सिर्फ 'शराब की महक' के शक पर दस महीने से जब्त थी ट्रक; पटना हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई कड़ी फटकार; दे दिया बड़ा आदेश

बिहार में शराबबंदी कानून के नाम पर पुलिसिया मनमानी और अति-उत्साह का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पटना हाईकोर्ट ने गोपालगंज के कुचायकोट थाने में पिछले दस महीनों से अवैध रूप से जब्त एक ट्रक को तुरंत रिहा करने का बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने महज 'शराब की महक' आने के संदेह पर की गई इस कार्रवाई को कानून का मजाक बताया है। यह आदेश एकल पीठ ने ट्रक मालिक राजेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

सिर्फ 'शराब की महक' के शक पर दस महीने से जब्त थी ट्रक; पटना हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई कड़ी फटकार; दे दिया बड़ा आदेश

DESWA DESK : बिहार में शराबबंदी कानून के नाम पर पुलिसिया मनमानी और अति-उत्साह का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पटना हाईकोर्ट ने गोपालगंज के कुचायकोट थाने में पिछले दस महीनों से अवैध रूप से जब्त एक ट्रक को तुरंत रिहा करने का बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने महज 'शराब की महक' आने के संदेह पर की गई इस कार्रवाई को कानून का मजाक बताया है। यह आदेश एकल पीठ ने ट्रक मालिक राजेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

कुचायकोट थाने के सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) सतेंद्र कुमार राय ने वाहन चेकिंग के दौरान राजेश कुमार यादव की ट्रक को रोका था। जांच के दौरान पूरी गाड़ी में से एक बूंद भी शराब बरामद नहीं हुई। इसके बावजूद दारोगा ने दावा किया कि ट्रक के केबिन से 'शराब की तेज महक' आ रही थी। इसी महज एक संदेह को आधार बनाकर दारोगा ने बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली और ट्रक को थाने में जब्त कर लिया।

सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने पुलिस की इस थ्योरी पर सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस बरामदगी के, सिर्फ 'महक' के आधार पर किसी की व्यावसायिक गाड़ी को दस माह तक थाने में सड़ने के लिए छोड़ देना नागरिक अधिकारों और कानून का सरासर उल्लंघन है। कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि क्या पुलिस अधिकारियों के पास महक सूंघने का कोई वैज्ञानिक पैमाना या 'गैस डिटेक्टर' था, जिसके आधार पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई?

अदालत ने गोपालगंज जिला प्रशासन और कुचायकोट थाना पुलिस को बिना किसी देरी के ट्रक को उसके असली मालिक राजेश कुमार यादव को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि शराबबंदी कानून का उद्देश्य अवैध शराब की तस्करी को रोकना है, न कि बिना सबूत के आम नागरिकों और उनके रोजगार के साधनों को प्रताड़ित करना। सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने इस मामले में बिना किसी ठोस सबूत के एफआईआर दर्ज करने वाले दारोगा सतेंद्र कुमार राय की कार्यशैली पर भी गंभीर टिप्पणी की है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप है।

हाईकोर्ट के इस तल्ख रुख के बाद कानूनी गलियारों में इसे पुलिस की मनमानी पर एक बड़ा ब्रेक माना जा रहा है। ट्रक मालिक राजेश यादव ने कोर्ट के इस फैसले पर न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस के इस रवैये के कारण पिछले 10 महीनों से उनका पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया था और गाड़ी का लोन चुकाना भारी पड़ रहा था।