दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक पर विधानसभा में भारी हंगामा; विपक्ष का कड़ा विरोध, चमड़ा उधेड़ लीजिए और...? 

विधेयक का विरोध करते हुए राजद विधायक राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का खजाना खाली हो चुका है और इसकी भरपाई के लिए अब आम जनता पर नया आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। राहुल शर्मा ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि अपने राज्य के लोगों का चमड़ा उधेड़ लीजिए और उसका जूता बनवा लीजिए।

दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक पर विधानसभा में भारी हंगामा; विपक्ष का कड़ा विरोध, चमड़ा उधेड़ लीजिए और...? 

DESWA DESK : विधानसभा में आज बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त जुबानी तीर चले। म्यूटेशन प्रक्रिया पर दो सौ रुपये का नया शुल्क लागू करने के प्रस्ताव पर आक्रोशित आरजेडी और एआईएमआईएम के विधायकों ने सदन में सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच सरकार ने इस विधेयक को पास करा लिया।

विधेयक का विरोध करते हुए राजद विधायक राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का खजाना खाली हो चुका है और इसकी भरपाई के लिए अब आम जनता पर नया आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। राहुल शर्मा ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि अपने राज्य के लोगों का चमड़ा उधेड़ लीजिए और उसका जूता बनवा लीजिए।

वहीं, एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने भी कहा कि गरीबों को परेशान मत कीजिए। उनकी आह लगेगी तो बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि यदि शुल्क बढ़ाना अनिवार्य ही है तो इसे 50 रुपये किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि इन दिनों विपक्ष को खजाना खाली का फोबिया हो गया है। जो व्यक्ति लाखों-करोड़ों खर्च करके जमीन खरीद रहा है, क्या वह दाखिल-खारिज के लिए दो सौ रुपये का मामूली शुल्क नहीं दे सकता है। उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त तक राज्य के 30 हजार भूमिहीन गरीबों को बासगीत पर्चा दिया जाएगा।

राजस्व मंत्री के बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी तेज कर दी और वेल में आकर विरोध जताया। हालांकि सरकार ने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस संशोधन विधेयक को सदन से पारित करा लिया। इस फैसले के बाद राज्य में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए भी अब निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य हो जाएगा।