अब बिहार में कम कीमत बताकर जमीन-मकान की रजिस्ट्री पड़ेगी भारी; सौ फीसदी तक लगेगा जुर्माना..जांच का दायरा भी बढ़ा

बिहार में जमीन, मकान या किसी भी अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री में स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए वास्तविक कीमत छिपाने का खेल अब भारी पड़ेगा। राज्य सरकार ने भारतीय स्टांप संशोधन विधेयक-2026 लागू करते हुए इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नए कड़े नियमों के तहत अब राजस्व चोरी करने वालों पर सीधे सौ फीसदी तक का जुर्माना ठोका जाएगा। साथ ही, संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच की समयसीमा को भी बढ़ाकर चार साल कर दिया गया है।

अब बिहार में कम कीमत बताकर जमीन-मकान की रजिस्ट्री पड़ेगी भारी; सौ फीसदी तक लगेगा जुर्माना..जांच का दायरा भी बढ़ा

DESWA DESK :  बिहार में जमीन, मकान या किसी भी अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री में स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए वास्तविक कीमत छिपाने का खेल अब भारी पड़ेगा। राज्य सरकार ने भारतीय स्टांप संशोधन विधेयक-2026 लागू करते हुए इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नए कड़े नियमों के तहत अब राजस्व चोरी करने वालों पर सीधे सौ फीसदी तक का जुर्माना ठोका जाएगा। साथ ही, संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच की समयसीमा को भी बढ़ाकर चार साल कर दिया गया है।

निबंधन विभाग का मानना है कि इस कदम से राज्य में हर साल होने वाले हजारों फर्जीवाड़ों और राजस्व नुकसान पर लगाम लगेगा। पहले स्टांप ड्यूटी चोरी पकड़े जाने पर अधिकतम दस फीसदी तक जुर्माना लगता था। अब अगर जानबूझकर बाजार मूल्य कम दिखाकर रजिस्ट्री कराई तो बकाया स्टांप शुल्क के साथ-साथ सौ प्रतिशत जुर्माना भी वसूला जाएगा। पहले रजिस्ट्री में गड़बड़ी की जांच केवल दो साल के भीतर ही हो सकती थी, लेकिन अब सरकार ने जांच अवधि बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया है। 

यानी रजिस्ट्री के चार साल बाद भी मामला सामने आने पर कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी (डीएम) या सहायक निबंधन महानिरीक्षक (एआईजी) द्वारा मामला साबित होने के बाद 60 दिनों के भीतर जुर्माना व बकाया राशि जमा करनी होगी। तय समय पर भुगतान न करने पर ब्याज भी वसूला जाएगा। हालांकि कुल ब्याज की राशि मूल चोरी की रकम से अधिक नहीं होगी। यदि निबंधन अधिकारी को अचल संपत्ति की घोषित कीमत पर थोड़ा-सा भी संदेह हुआ तो वे रजिस्ट्री रोककर मामला सीधे डीएम या एआईजी के पास भेज सकेंगे। वहां से संपत्ति का सही बाजार मूल्य तय होने के बाद ही रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होगी।

मामलों के जल्द निपटारे के लिए सहायक निबंधन महानिरीक्षक (एआईजी) को भी सुनवाई और फैसले के अधिकार दे दिए गए हैं। पहले केवल डीएम कोर्ट में ही सुनवाई होने के कारण हजारों मामले सालों तक लंबित रह जाते थे। राजस्व चोरी पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। जमीनों का सटीक मूल्यांकन करने के लिए जीपीएस मैपिंग और डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स की मदद ली जा रही है। इससे व्यावसायिक जमीन को आवासीय या कृषि बताकर कम स्टांप ड्यूटी देने की चालाकी नहीं चल पाएगी।