बांकीपुर में जनसुराज ने रचा इतिहास : बीजेपी का 31 साल पुराना अभेद्य दुर्ग ध्वस्त, प्रशांत किशोर ने 19 हजार से अधिक वोटों से दर्ज की बड़ी जीत
भारतीय जनता पार्टी का सबसे सुरक्षित, मजबूत और 31 वर्षों से अभेद्य माना जाने वाला बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र अब जनसुराज के पाले में चला गया है। इस हाईप्रोफाइल उपचुनाव में जनसुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने एनडीए समर्थित बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को करीब 19324 वोटों के भारी-भरकम अंतर से धूल चटा दी है।
DESWA DESK : 1995 से जिस सीट पर बीजेपी का एकछत्र राज था, जिस सीट से विधायक रहे नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, वहां जनसुराज के प्रशांत किशोर के सामने पूरी एनडीए धराशायी हो गई। बिहार की राजनीति में सोमवार को वो इतिहास रच दिया गया, जिसकी कल्पना शायद सत्ता के गलियारों में किसी ने नहीं की थी।
भारतीय जनता पार्टी का सबसे सुरक्षित, मजबूत और 31 वर्षों से अभेद्य माना जाने वाला बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र अब जनसुराज के पाले में चला गया है। इस हाईप्रोफाइल उपचुनाव में जनसुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने एनडीए समर्थित बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को करीब 19324 वोटों के भारी-भरकम अंतर से धूल चटा दी है।
पहले दौर की मतगणना से शुरू हुई प्रशांत किशोर की बढ़त का सिलसिला अंतिम यानी 32वें राउंड तक लगातार बढ़ता ही चला गया। अकेले प्रशांत किशोर पूरी एनडीए के दिग्गज नेताओं पर भारी पड़े हैं। 32वें (अंतिम) राउंड के बाद जनसुराज के प्रशांत किशोर को 64151 वोट मिले हैं, और वे ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बिहार में तीसरे विकल्प के रूप में उभरे हैं।
नीरज कुमार सिन्हा (बीजेपी) को 44827 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे हैं। 31 साल पुराने गढ़ में नीरज सिन्हा की करारी हार हुई है। जबकि, आरजेडी की रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं हैं और उन्हें 14273 वोट से ही संतोष करना पड़ा है।
इसके साथ ही, 1995 से कायम 'सिन्हा परिवार' और बीजेपी का दबदबा खत्म हो गया है। बांकीपुर (पूर्व में पटना पश्चिम) केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि बीजेपी का वैचारिक और राजनीतिक केंद्र मानी जाती रही है। 31 साल से इस सीट पर बीजेपी का एकाधिकार रहा है। इस सीट पर 1995 से लगातार बीजेपी का कब्जा था, और नितिन नवीन और उनके पिता का गढ़ माना जाता था।
पहले बीजेपी के दिग्गज नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और उनके बाद उनके पुत्र तथा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार पांच बार यहां से विधायक चुने गए। नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद रिक्त हुई इस सीट पर बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा, लेकिन वे प्रशांत किशोर के राजनीतिक कद और जनसुराज के आक्रामक प्रचार के सामने कहीं भी टिकते नजर नहीं आए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में बीजेपी की हार की सबसे बड़ी वजह उनका कमजोर प्रत्याशी चयन रहा। पार्टी कार्यकर्ता जिस उम्मीदवार को एनडीए के सबसे मजबूत गढ़ को बचाने के लिए काफी मान रहे थे, वे प्रशांत किशोर के विजन, जमीनी मुद्दों और जनसुराज के सिद्धांतों के आगे बेअसर साबित हुए। बांकीपुर के प्रबुद्ध और शहरी मतदाताओं ने पारंपरिक जातिगत समीकरणों को नकारते हुए प्रशांत किशोर की नीतियों और बिहार के नवनिर्माण के उनके एजेंडे को हाथों-हाथ लिया।
राजधानी पटना के बीचों-बीच स्थित सबसे सुरक्षित सीट को गंवाना बीजेपी और सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के लिए एक बड़ा नैतिक झटका है। प्रशांत किशोर की इस जीत ने साफ कर दिया है कि बिहार में अब मुकाबला केवल एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं रहा, बल्कि जनसुराज पार्टी नई मुख्यधारा के साथ बड़े विकल्प के रूप में स्थापित हो चुकी है।













