Chaiti Chhath 2025: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चैती छठ महापर्व का समापन, गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
आज बिहार में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हो गया। चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के चौथे दिन व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्ध्य अर्पित किया। सुबह 4 बजे से ही गंगा घाटों पर छठ व्रतियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। वहीं राजधानी पटना में 41 गंगा घाट और 7 तालाबों पर व्रतियों और श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। ...

आज बिहार में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हो गया। चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के चौथे दिन व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्ध्य अर्पित किया। सुबह 4 बजे से ही गंगा घाटों पर छठ व्रतियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। वहीं राजधानी पटना में 41 गंगा घाट और 7 तालाबों पर व्रतियों और श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। कई श्रद्धालुओं ने घरों में बनाए गए विशेष जलाशयों पर भी पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
भक्तों ने विधिवत भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया
बता दें कि भक्तों ने विधिवत भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान घाटों में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार में छठ घाटों पर पहुंचीं। घाटों पर भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो गया था। वहीं इस बार छठ पर्व में स्वच्छता और अनुशासन को विशेष महत्व दिया गया। श्रद्धालुओं ने घाटों की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा। स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे किसी भी तरह की असुविधा नहीं हुई।
यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है
दरअसल लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो सूर्य देवता को समर्पित है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, एक बार ग्रीष्म ऋतु में और दूसरी बार शरद ऋतु में। छठ पूजा की भव्यता बिहार-झारखंड और यूपी के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। चैती छठ व्रत को अत्यंत कठिन और नियम-संयम वाला व्रत माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की मंगल कामना और दीर्घायु के लिए किया जाता है। श्रद्धालु व्रतधारी चार दिनों तक विशेष नियमों का पालन करते हुए सूर्यदेव की आराधना करते हैं।