NEET छात्रा केस: 90 दिन में चार्जशीट नहीं, हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को डिफॉल्ट बेल

शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई। अदालत ने उन्हें डिफॉल्ट बेल दी है, जो जांच एजेंसी की प्रक्रिया में हुई देरी के कारण संभव..

NEET छात्रा केस: 90 दिन में चार्जशीट नहीं, हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को डिफॉल्ट बेल

NEET छात्रा रेप-मौत मामले में एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई। अदालत ने उन्हें डिफॉल्ट बेल दी है, जो जांच एजेंसी की प्रक्रिया में हुई देरी के कारण संभव हुई है—न कि मामले के तथ्यों या सबूतों के आधार पर।

CBI निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी

दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होता है। इस अवधि के पूरा होने पर आरोपी को स्वतः जमानत का अधिकार मिल जाता है। इसी प्रावधान के तहत मनीष रंजन को राहत मिली है।

जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा

हालांकि, अदालत ने 10 अप्रैल 2026 को ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि तय समय के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा भी की है। फिलहाल, मनीष रंजन की रिहाई तुरंत नहीं हो सकी है, क्योंकि उनका बेल बॉन्ड अदालत में पेश नहीं हो पाया। सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव होगी।

यह जमानत आरोपी को दोषमुक्त नहीं ठहराती

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह जमानत आरोपी को दोषमुक्त नहीं ठहराती। यह पूरी तरह तकनीकी आधार पर दी गई राहत है। मामले की सुनवाई जारी रहेगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्यों की भूमिका अहम होगी। इधर, पीड़ित पक्ष अपने रुख पर कायम है। उनका कहना है कि वे इस फैसले से निराश जरूर हैं, लेकिन न्याय की लड़ाई अंत तक जारी रखेंगे। वहीं अदालत परिसर में CBI अधिकारियों का संयमित रुख भी चर्चा का विषय बना रहा। आमतौर पर ऐसे संवेदनशील मामलों में एजेंसियों पर दबाव देखा जाता है, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आई।