“कॉलेज है, कोठा नहीं” के नारों से गूंजा कैंपस, IGIMS नर्सिंग कॉलेज में दूसरे दिन भी जारी छात्राओं का प्रदर्शन
कॉलेज है, कोठा नहीं…”इसी नारे के साथ पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं दूसरे दिन भी सड़क पर डटी रहीं। गुस्साई छात्राओं ने संस्थान...
“कॉलेज है, कोठा नहीं…”इसी नारे के साथ पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं दूसरे दिन भी सड़क पर डटी रहीं। गुस्साई छात्राओं ने संस्थान के मेन गेट पर धरना देकर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिससे अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित हो गई।
छात्राओं का प्रदर्शन शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा
पटना के IGIMS नर्सिंग कॉलेज में छात्राओं का प्रदर्शन शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्राएं संस्थान के मुख्य गेट के बाहर बैठी रहीं, जिसके कारण अस्पताल का प्रवेश द्वार पूरी तरह बाधित हो गया। प्रदर्शन की वजह से एंबुलेंस, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित हुई।
मानसिक प्रताड़ना बंद करो
छात्राओं ने कॉलेज की प्रिंसिपल अनुजा डैनियल और वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दोनों अधिकारी छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करती हैं, गालियां देती हैं और कई बार मारपीट भी करती हैं। छात्राओं का आरोप है कि जानबूझकर उन्हें परीक्षा में फेल किया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।धरने पर बैठी छात्राओं के हाथों में कई पोस्टर और तख्तियां थीं, जिन पर “कॉलेज है, कोठा नहीं”, “मानसिक प्रताड़ना बंद करो”, “हमें न्याय चाहिए” और “प्रिंसिपल व वाइस प्रिंसिपल को बर्खास्त करो” जैसे नारे लिखे थे। छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
हमारी शिकायतों को दबाने की कोशिश की गई
गुरुवार को भी छात्राओं ने कॉलेज परिसर के अंदर प्रदर्शन किया था। साल 2021 से 2025 बैच तक की करीब 450 छात्राएं इस आंदोलन में शामिल हुई थीं। छात्राओं ने सुबह से ही क्लास का बहिष्कार कर मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया था।प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने शिकायत की हो। करीब 10 महीने पहले भी वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ लिखित शिकायत दी गई थी। उस समय संस्थान प्रशासन ने जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी बनाई थी, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक को दबाने की कोशिश की गई। की गई और न ही कोई कार्रवाई हुई।एक छात्रा ने कहा, “हमें पहले भरोसा दिलाया गया था कि निष्पक्ष जांच होगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। हमारी शिकायतों को दबाने की कोशिश की गई। अब मजबूर होकर हमें सड़क पर उतरना पड़ा है।”













