Sathankulam custodial death case:पिता-पुत्र की मौत पर सजा 9 को… न्याय हुआ या सिस्टम फेल?

तमिलनाडु के चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में अदालत के फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस सिस्टम की जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन इस फैसले के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि क्या जिम्मेदारी.....

Sathankulam custodial death case:पिता-पुत्र की मौत पर सजा 9 को… न्याय हुआ या सिस्टम फेल?

तमिलनाडु के चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में अदालत के फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस सिस्टम की जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन इस फैसले के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि क्या जिम्मेदारी सिर्फ थाने तक सीमित थी?

क्या था पूरा मामला?
साल 2020 में तमिलनाडु के सथानकुलम में एक पिता और बेटे को पुलिस हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि थाने के अंदर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिसके बाद कुछ ही समय में दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले की जांच के बाद कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों—सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई  गई लेकिन इस फैसले के बाद एक सवाल देशभर में गूंज रहा है 
क्या न्याय पूरा हुआ, या जिम्मेदारी अधूरी रह गई?

सवालों के घेरे में सिस्टम:
बता दें कि इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ 9 लोगों की व्यक्तिगत गलती थी, या फिर यह पूरे सिस्टम की नाकामी का परिणाम है। घटना थाने में हुई, इसलिए सजा भी थाने तक सीमित रही, लेकिन पुलिस व्यवस्था की हकीकत यह है कि उसका संचालन और निगरानी उच्च अधिकारियों—जैसे DSP और SP—के स्तर पर होती है। इसके बावजूद इन पदों की जवाबदेही इस मामले में तय होती नहीं दिखी।

जिम्मेदारी का असंतुलन:
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई बड़ी सफलता मिलती है, तो उसका श्रेय वरिष्ठ अधिकारियों को दिया जाता है और कहा जाता है  मेरी टीम , मेरे नेतृत्व में लेकिन जब कोई गंभीर घटना सामने आती है, तो जिम्मेदारी निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित कर दी जाती है और उसे  थाने की गलती , कुछ लोगों की हरकत बता दिया जाता है।इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिस्टम में जवाबदेही का संतुलन सही तरीके से तय है?

कानूनी पक्ष क्या कहता है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार, जिस व्यक्ति ने अपराध किया है, सजा उसी को मिलती है। यही वजह है कि जिन पुलिसकर्मियों पर सीधे तौर पर मारपीट के आरोप साबित हुए, उन्हें दोषी ठहराया गया लेकिन जो अधिकारी सिस्टम की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालते हैं, उनकी जवाबदेही तय करना कानूनी रूप से जटिल हो जाता है।सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला मामला बन गया है। यह मामला सिर्फ 9 लोगों की सजा का नहीं है। यह उस सिस्टम का आईना है, जिसमें नाम ऊपर के होते हैं, फैसले ऊपर से आते हैं लेकिन सजा नीचे तक सीमित रह जाती है।  जब तक सिस्टम में ऊपर से नीचे तक बराबर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक न्याय अधूरा ही रहेगा।