डिजिटल अपराध और पेपर लीक पर बड़ा प्रहार : सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और अमर्यादित टिप्पणी पर लगेगा गुंडा एक्ट
अब सोशल मीडिया पर गाली-गलौज, अमर्यादित टिप्पणी या शांति भंग करने वाली आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने वालों पर सीधे गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा, प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करने वाले माफियाओं और अपराधियों को भी इसी सख्त कानून के दायरे में लाया गया है।
DESWA DESK : राज्य सरकार ने डिजिटल अपराध, सोशल मीडिया पर अश्लीलता-अभद्रता और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली पेपर लीक करने वालों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम- 2024 में संशोधन विधेयक के प्रारूप को हरी झंडी दे दी गई।
इस संशोधन के बाद अब सोशल मीडिया पर गाली-गलौज, अमर्यादित टिप्पणी या शांति भंग करने वाली आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने वालों पर सीधे गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा, प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करने वाले माफियाओं और अपराधियों को भी इसी सख्त कानून के दायरे में लाया गया है।
नए संशोधनों के तहत पुलिस प्रशासन और जिलाधिकारियों को असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए व्यापक शक्तियां दी गई हैं। यदि किसी जिलाधिकारी को यह लगता है कि किसी व्यक्ति की ऑनलाइन या डिजिटल गतिविधियां समाज में तनाव या शांति भंग कर रही हैं, तो उसे बिना जमानत तीन महीने तक जेल भेजा जा सकेगा।
ऐसे मामलों में दोषियों को छह महीने से लेकर एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। आरोपी व्यक्ति को संबंधित जिले या तय सीमा से बाहर (तड़ीपार) रहने का आदेश दिया जा सकता है।
साथ ही, उसे स्थानीय थाने में नियमित हाजिरी लगानी होगी और उसकी डिजिटल व सोशल मीडिया गतिविधियों पर सीधे या तकनीकी माध्यम से 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी।सरकार के इस फैसले के बाद अब सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा या आपत्तिजनक कंटेंट डालना गंभीर अपराध माना गया है। वही, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वालों पर गुंडा एक्ट लागू होगा। विवादित और भड़काऊ डिजिटल गतिविधियों पर तत्काल सीधी कार्रवाई का अधिकार पुलिस प्रशासन को दिया गया है। सजा या पाबंदी के दौरान आरोपी की सोशल मीडिया एक्टिविटी पर रहेगी पुलिस की नजर।
दरअसल, हाल के दिनों में सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ बयानबाजी, व्यक्तिगत चरित्र हनन और साइबर अपराधों में वृद्धि देखी गई है। वहीं, पेपर लीक माफियाओं द्वारा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के मामले भी लगातार सामने आ रहे थे। सरकार के इस कदम से न केवल साइबर स्पेस में मर्यादित आचरण सुनिश्चित होगा, बल्कि परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। कैबिनेट के इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि डिजिटल दुनिया में अराजकता फैलाने वाले और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।













