नीट पेपर लीक व लाठीचार्ज पर विधानसभा में पक्ष-विपक्ष के बीच हाथापाई की नौबत, कार्यवाही स्थगित
नीट पेपर लीक और राजधानी पटना में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर गुरुवार को बिहार विधानसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। मानसून सत्र की चैथे दिन की शुरुआत होते ही विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आकर हंगामा करने लगे। स्थिति यह हो गई कि सत्त पक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। पक्ष-विपक्ष के विधायक एक-दूसरे की ओर बढ़े ही थे कि मार्शलों ने आकर बीच-बचाव किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
DESWA DESK : नीट पेपर लीक और राजधानी पटना में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर गुरुवार को बिहार विधानसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। मानसून सत्र की चैथे दिन की शुरुआत होते ही विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आकर हंगामा करने लगे।
स्थिति यह हो गई कि सत्त पक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। पक्ष-विपक्ष के विधायक एक-दूसरे की ओर बढ़े ही थे कि मार्शलों ने आकर बीच-बचाव किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
दरअसल, विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी दलों के विधायक हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पोर्टिको में जमा हो गए। भाजपा हटाओ, शिक्षा बचाओ और छात्रों पर पुलिस बर्बरता नहीं चलेगी के नारों के साथ विधायक धरने पर बैठ गए। विपक्ष के पोस्टरों पर 10 वर्षों में 152 पेपर लीक क्यों? भाजपा सरकार जवाब दो, और सड़क पर उतरे छात्र, न्याय की है सिर्फ एक बात...नहीं सुनेंगे पीएम मोदी के मन की बात-जैसे स्लोगन लिखे हुए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
हंगामे के बीच सदन में बीजेपी विधायक श्याम बाबू यादव ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बीते दिन डाकबंगला चौराहे पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि कल डाकबंगला चौराहे पर जो प्रदर्शन हुआ, उसमें छात्र नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के गुंडे शामिल थे। मुझ पर और मेरे गार्ड्स पर जानलेवा हमला किया गया। अगर समय पर बचाव न होता तो कल मेरी हत्या हो जाती।
विधायक के इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई, और देखते ही देखते हाथापाई की नौबत आ गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
दरअसल, विपक्ष नीट परीक्षा में धांधली और पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ पारदर्शी परीक्षा की मांग कर रहा था। वहीं, सत्ता पक्ष प्रदर्शन की आड़ में उपद्रव और जनप्रतिनिधियों पर हमले का आरोप लगा रहा था। इसका असर यह हुआ कि दोनों ओर से खूब शोर-शराबा हुआ और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।













