बिहार की राजनीति में युगांत: CM पद से विदा के बाद नई भूमिका में नीतीश कुमार, आज राज्यसभा सांसद की लेंगे शपथ

बिहार की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों तक सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद को अलविदा कहकर राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।नीतीश कुमार आज दोपहर 12.30 बजे राज्यसभा सांसद की शपथ लेंगे। वहीं  यह सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है जिसने बिहार की सोच, संरचना .....

बिहार की राजनीति में युगांत: CM पद से विदा के बाद नई भूमिका में नीतीश कुमार, आज राज्यसभा सांसद की लेंगे शपथ

बिहार की राजनीति एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों तक सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद को अलविदा कहकर राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।नीतीश कुमार आज दोपहर 12.30 बजे राज्यसभा सांसद की शपथ लेंगे। वहीं  यह सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है जिसने बिहार की सोच, संरचना और शासन शैली को नई दिशा दी।

उनके विरोधी भी सम्मान की नजर से देखते हैं
करीब 19 साल 236 दिनों तक बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने विकास के साथ न्याय और  सुशासन को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनकी कार्यशैली ने आक्रामक राजनीति के बजाय संवाद और समन्वय को प्राथमिकता दी, जिससे बिहार में एक संतुलित राजनीतिक संस्कृति विकसित हुई। सादगी और ईमानदारी को अपनी ढाल बनाकर उन्होंने न केवल राज्य की तस्वीर बदली, बल्कि भारतीय राजनीति में अपनी एक ऐसी धवल छवि बनाई जिसे उनके विरोधी भी सम्मान की नजर से देखते हैं।

 राज्य ने कई ऐतिहासिक बदलाव देखे
उनके नेतृत्व में राज्य ने कई ऐतिहासिक बदलाव देखे। कभी बदहाल सड़कों और सीमित कनेक्टिविटी के लिए पहचान रखने वाला बिहार आज बेहतर सड़क नेटवर्क से जुड़ा है। राजधानी पटना से लेकर सुदूर गांवों तक पहुंच आसान हुई है।शिक्षा के क्षेत्र में उनकी साइकिल योजना ने खासतौर पर बेटियों को स्कूल तक पहुंचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा फिर से कायम किया गया। वहीं, बिजली के क्षेत्र में किए गए सुधारों का नतीजा है कि आज ग्रामीण इलाकों तक भी लगभग 24 घंटे बिजली पहुंच रही है।

राजनीतिक सफर और उपलब्धियां
बता दें कि नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन 1985 में विधायक बनने से शुरू हुआ। इसके बाद वे 6 बार लोकसभा सांसद बने और रिकॉर्ड 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब राज्यसभा की ओर बढ़ते हुए वे संसदीय लोकतंत्र के चारों सदनों लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद और राज्यसभा का हिस्सा बनकर अपनी संसदीय यात्रा को पूर्णता दी है।उनके कार्यकाल में लिए गए बड़े फैसलों में शराबबंदी और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें एक समाज सुधारक नेता के रूप में स्थापित किया।

नई सरकार खरमास बाद 15 या फिर 16 अप्रैल 
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार द्वारा खींची गई विकास की इस लंबी लकीर को आगे कौन और कैसे बढ़ाएगा। एनडीए खेमे का कहना है कि नई सरकार उनके मार्गदर्शन में ही आगे बढ़ेगी, लेकिन उनकी बनाई ऊंचाइयों को बनाए रखना आसान नहीं होगा। बल्की उसे बरकरार रखना आने वाले नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नई सरकार खरमास बाद 15 या फिर 16 अप्रैल को अस्तित्व में आ सकती है।