बिहार की राजनीति में हलचल तेज: सीएम बदलने की अटकलें, चिराग पासवान ने किया खुद को रेस से बाहर
बिहार की सियासत इन दिनों तेजी से करवट लेती दिख रही है। सत्ता के गलियारों में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें जोरों पर हैं, वहीं नेताओं के बयान इस राजनीतिक सरगर्मी को और हवा दे रहे हैं।इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा बयान देते हुए मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस रेस में नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार का चेहरा बदल सकता....
बिहार की सियासत इन दिनों तेजी से करवट लेती दिख रही है। सत्ता के गलियारों में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें जोरों पर हैं, वहीं नेताओं के बयान इस राजनीतिक सरगर्मी को और हवा दे रहे हैं।इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा बयान देते हुए मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस रेस में नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार का चेहरा बदल सकता है, लेकिन गठबंधन का मौजूदा फॉर्मूला बरकरार रहेगा।
सियासी अटकलें और तेज
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। पटना स्थित उनके आधिकारिक आवास से सामान शिफ्ट होने की खबरों ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है। शनिवार सुबह जेडीयू में हलचल उस वक्त और बढ़ गई, जब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। करीब दो घंटे चली इस अहम बैठक में संभावित नए मंत्रिमंडल के स्वरूप पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, इस बार सरकार में युवा चेहरों को प्राथमिकता देने पर भी मंथन किया गया।
पटना में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित
उधर,बीजेपी भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। पटना में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें बिहार प्रभारी विनोद तावड़े शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम और सरकार गठन की रणनीति पर गहन चर्चा हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि एक नेता स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहा है, जबकि उनके परिवार में ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का जिक्र करते हुए आरजेडी के भविष्य पर भी सवाल उठाए।













