भागलपुर में कोर्ट की सख्ती: दो दरोगाओं को आत्मसमर्पण के बाद ढाई घंटे तक रखा गया कस्टडी में, हिदायत के साथ मिली बेल
बिहार के भागलपुर जिले से एक अहम मामला सामने आया है, जहां अदालत ने न्यायिक आदेश की अवहेलना करने वाले दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। नाथनगर थाना में पदस्थापित रहे दरोगा रोहित रितेश और राजीव रंजन को अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद करीब ढाई घंटे तक कस्टडी में रखा गया। बाद में कोर्ट ने कड़ी हिदायत के साथ उनकी जमानत....
बिहार के भागलपुर जिले से एक अहम मामला सामने आया है, जहां अदालत ने न्यायिक आदेश की अवहेलना करने वाले दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। नाथनगर थाना में पदस्थापित रहे दरोगा रोहित रितेश और राजीव रंजन को अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद करीब ढाई घंटे तक कस्टडी में रखा गया। बाद में कोर्ट ने कड़ी हिदायत के साथ उनकी जमानत अर्जी स्वीकार की।प्रथम श्रेणी की न्यायिक दंडाधिकारी सलोनी कुमारी की अदालत में यह कार्रवाई उस समय हुई, जब दोनों दरोगा पूर्व में जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के बाद कोर्ट में उपस्थित हुए। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
कस्टडी में रखने का आदेश
जैसे ही दोनों पुलिस अधिकारी कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचे, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें लगभग ढाई घंटे तक न्यायिक कस्टडी में रखने का आदेश दिया। इस दौरान कोर्ट ने उनके आचरण पर नाराजगी भी जताई।काफी देर तक कस्टडी में रखने के बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली, लेकिन साथ ही सख्त शर्त लगाई कि भविष्य में वे अदालत के सभी आदेशों का अक्षरशः पालन करेंगे और हर सुनवाई की तारीख पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे।
युवती की शिकायत से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला नाथनगर थाना क्षेत्र के नरगा की रहने वाली एक युवती नेहा द्वारा दर्ज कराए गए कंप्लेंट केस से जुड़ा है। परिवादिनी ने आरोप लगाया था कि पारिवारिक विवाद की सूचना मिलने पर दोनों दरोगा अन्य पुलिसकर्मियों के साथ जबरन उसके घर में घुस गए थे।युवती का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने न केवल उसके घर में जबरन प्रवेश किया, बल्कि उसके और उसकी मां के साथ अभद्र व्यवहार और बदसलूकी भी की। इसी शिकायत के आधार पर दोनों दरोगा को आरोपी बनाया गया था।
कोर्ट में अनुपस्थित रहने पर जारी हुआ था NBW
सुनवाई के दौरान अदालत में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण पहले उनका बेल बॉन्ड रद्द कर दिया गया था और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। बुधवार को हुई सुनवाई में परिवादिनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आलय बनर्जी ने पक्ष रखते हुए पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए यह संदेश दिया कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय है, चाहे वे पुलिस अधिकारी ही क्यों न हों। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।













