पटना में सियासी मुलाकात: CM सम्राट चौधरी से मिले नीतीश कुमार, 20 मिनट की बातचीत के कई मायने

बिहार की राजनीति में एक अहम तस्वीर सामने आई, जब पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट...

पटना में सियासी मुलाकात: CM सम्राट चौधरी से मिले नीतीश कुमार, 20 मिनट की बातचीत के कई मायने

बिहार की राजनीति में एक अहम तस्वीर सामने आई, जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक चली इस बातचीत ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर नीतीश कुमार का स्वागत किया

बता दें कि पटना स्थित 5, देशरत्न मार्ग पर हुई इस मुलाकात के दौरान माहौल काफी सहज और सम्मानपूर्ण नजर आया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाथ जोड़कर नीतीश कुमार का स्वागत किया, वहीं नीतीश कुमार ने मुस्कुराते हुए कंधे पर हाथ रखकर अभिवादन किया। यह तस्वीर अपने आप में कई राजनीतिक संकेत देती दिखी।

नीतीश कुमार खुद सम्राट चौधरी से मिलने उनके आवास पहुंचे

जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, नई सरकार के कामकाज और आने वाली रणनीतियों को लेकर चर्चा हुई। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब नीतीश कुमार खुद सम्राट चौधरी से मिलने उनके आवास पहुंचे। बता दें कि इससे पहले, मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी खुद एक अणे मार्ग जाकर नीतीश कुमार से मिले थे। इसके अलावा उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर समेत कई नेताओं से भी मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था।

बदलते सियासी समीकरणों की ओर भी इशारा 

वहीं इस मुलाकात को महज शिष्टाचार नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार का अनुभव और मार्गदर्शन नई सरकार के लिए अहम साबित हो सकता है। साथ ही, यह मुलाकात बिहार में बदलते सियासी समीकरणों की ओर भी इशारा करती है।

एक नए दौर की शुरुआत 

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनके साथ विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस बदलाव के साथ राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। वहीं, नीतीश कुमार, जो लंबे समय तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे, अब राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भले ही उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों से दूरी बनाई हो, लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव अब भी बरकरार है।