बिहार में निजी वाहनों पर ब्रेक, नो व्हीकल डे पर जरूरी सेवाएं रहेंगी जारी
बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और ईंधन बचत की जरूरत के बीच बिहार सरकार राज्य में ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की तैयारी में है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निजी वाहनों, खासकर कार और बाइक के इस्तेमाल को सप्ताह में एक दिन कम करना है, ताकि...
बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और ईंधन बचत की जरूरत के बीच बिहार सरकार राज्य में ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की तैयारी में है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निजी वाहनों, खासकर कार और बाइक के इस्तेमाल को सप्ताह में एक दिन कम करना है, ताकि ईंधन की बचत के साथ-साथ प्रदूषण और ट्रैफिक पर भी नियंत्रण पाया जा सके।
जरूरी सेवाओं को इस अभियान से बाहर रखा जाएगा
सरकार ने साफ किया है कि आम जनजीवन को प्रभावित होने से बचाने के लिए जरूरी सेवाओं को इस अभियान से बाहर रखा जाएगा। एम्बुलेंस, पुलिस वाहन, दमकल गाड़ियां और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहेंगी। इसके अलावा, जरूरी सामानों की आपूर्ति करने वाले मालवाहक वाहनों को भी छूट दी गई है, ताकि बाजार और सप्लाई चेन पर असर न पड़े।
सामूहिक परिवहन के जरिए ईंधन की खपत में कमी आएगी
सरकार चाहती है कि ‘नो व्हीकल डे’ के दिन लोग अपने निजी वाहन घर पर छोड़कर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और ऑटो-रिक्शा के उपयोग को प्राथमिकता देने की अपील की जा रही है। माना जा रहा है कि इससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और सामूहिक परिवहन के जरिए ईंधन की खपत में कमी आएगी।
सरकार लोगों से इस अभियान में सहयोग की अपील कर रही है,
राज्य सरकार इस अभियान के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा देना चाहती है। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण मुक्त होने के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होंगे।
बिहार सरकार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सरकार लोगों से इस अभियान में सहयोग की अपील कर रही है, ताकि इसे जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।
मंत्रियों के काफिले में कटौती
बता दें कि मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देश में ईंधन की खपत कम करने का आह्वान किया था। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे आयोजित करने का मन बनाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद इसकी पहल करते हुए मंत्रियों के काफिले में कटौती के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि यदि प्रशासन खुद से शुरुआत करेगा, तभी आम जनता इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी।
सड़कों पर वाहनों का बोझ भी कम होगा
ईंधन बचाने के इस अभियान में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के कार्यालयों से अपील की है कि वे सप्ताह में एक या दो दिन वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की संस्कृति को बढ़ावा दें। यदि कर्मचारी घर से काम करेंगे, तो दफ्तर आने-जाने में खर्च होने वाला ईंधन बचेगा और सड़कों पर वाहनों का बोझ भी कम होगा।डिजिटल इंडिया के इस दौर में यह पहल बिहार की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने में भी मददगार साबित होगी।













