वर्दी और वैभव: 17 साल में 50 करोड़, चाय दुकान बना ट्रांजेक्शन हब,किशनगंज के थानेदार पर करोड़ो की संपत्ति का आरोप
कहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर होता है, लेकिन जब कानून की रक्षा करने वाले ही नियमों को अपने हिसाब से मोड़ने लगें, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे सिस्टम पर उठता....
कहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर होता है, लेकिन जब कानून की रक्षा करने वाले ही नियमों को अपने हिसाब से मोड़ने लगें, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे सिस्टम पर उठता है। बिहार के किशनगंज से सामने आया यह मामला उसी विडंबना की एक और कड़ी है।आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने किशनगंज के नगर थानेदार (फिलहाल लाइन हाजिर) अभिषेक कुमार रंजन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना, किशनगंज और सारण समेत 5 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मंगलवार सुबह शुरू हुई और देर तक चली। ईओयू ने 2009 बैच के इस दरोगा पर आय से 115.66% अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि 17 साल की नौकरी में अभिषेक ने करीब 50 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति खड़ी कर ली।
संपत्ति का जाल
बता दें कि जांच में जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली है, पटना के रामकृष्ण नगर में दो मंजिला आलीशान मकान, जिसमें प्राइवेट स्विमिंग पूल तक मौजूद। बागडोगरा और सिलीगुड़ी (प. बंगाल) में करोड़ों की जमीन। सारण (छपरा) में पैतृक घर पर लाखों का खर्च। मुजफ्फरपुर में खरीदी गई जमीन। बैंक खातों, एलआईसी, म्यूचुअल फंड और शेयर में लाखों का निवेश। इतना ही नहीं, तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज और निवेश से जुड़े प्रमाण भी बरामद हुए हैं । 7 ट्रक और एक सीबीजेड) बाइक। बड़े बेटे का सिलीगुड़ी के दिल्ली पब्लिक स्कूल में 2.50 लाख देकर एडमिशन। बता दें कि इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और शायद सबसे चिंताजनक है, वह है कमाई का तरीका। आरोप है कि सीधे रिश्वत लेने के बजाय पैसे एक चाय दुकान पर रखवाए जाते थे, जहां से उन्हें सुरक्षित जगह तक पहुंचाया जाता था। छोटी रकम वसूली के लिए ड्राइवर और मुंशी का इस्तेमाल होता था। यानी भ्रष्टाचार भी अब ‘डिजिटल इंडिया’ की तरह अपग्रेड हो चुका है—सिस्टम वही, बस तकनीक और तरीके आधुनिक।
माफिया कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि अभिषेक का संबंध जमीन, बालू और शराब माफियाओं से था। इन्हीं नेटवर्क्स के जरिए मोटी कमाई कर संपत्ति बनाई गई। इतना ही नहीं,तलाशी में अभिषेक रंजन और उनकी पत्नी के बैंक खातों में लगभग 8.5 लाख रुपए कैश मिला है। इसके अलावा एलआईसी में सालाना करीब एक लाख रुपए निवेश, म्यूचुअल फंड और शेयर में लगभग 20 लाख रुपए निवेश के सबूत मिले हैं।हाल ही में अभिषेक अपनी पत्नी के साथ पांच दिन के लिए मुंबई गया था। वहां वो ताज होटल में लग्जरियस रूम में ठहरे थे। अब जांच के घेरे में है।
दोनों के बीच लगातार संपर्क
साथ ही, किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम और अभिषेक रंजन काफी करीबी थानेदार थे। दोनों के बीच लगातार संपर्क और निवेश के पैटर्न ने ईओयू को इस केस तक पहुंचाया। बता दें कि गौतम ने किशनगंज रह चुके एक एसपी से कहकर अभिषेक की पोस्टिंग किशनगंज टाउन थाने में कराई थी। शराब, जमीन और बालू माफियाओं के साथ गौतम और अभिषेक ने मिलकर काली कमाई की। जहां गौतम ने निवेश किया वहां अभिषेक ने भी। गौतम और अभिषेक का किशनगंज में कार्यालय और सरकारी आवास पास में ही है पर हर दिन दोनों के बीच 40-50 बार बात होती थी। गौतम के मोबाइल के सीडीआर से ही अभिषेक का पता चला था। अभी किशनगंज के और पुलिस अधिकारी ईओयू के राडार पर हैं। बता दें कि यह मामला सिर्फ एक थानेदार की कथित भ्रष्ट कमाई का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की कहानी है जहां पोस्टिंग ‘सेट’ होती है वसूली ‘मैनेज’ होती है और कार्रवाई तब होती है जब ‘सिस्टम’ खुद जागता है सवाल यह है कि क्या ऐसे मामले अपवाद हैं, या फिर यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे हम सब जानते हैं, लेकिन स्वीकार नहीं करना चाहते?













