बख्तियारपुर में अधूरा ROB देख भड़के सीएम नीतीश,अधिकारियों को लगाई फटकार
बिहार की राजनीति इन दिनों एक बड़े सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है, जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस बीच राजनीतिक अटकलों के बीच भी मुख्यमंत्री लगातार अपने विकास कार्यों की ............
बिहार की राजनीति इन दिनों एक बड़े सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है, जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस बीच राजनीतिक अटकलों के बीच भी मुख्यमंत्री लगातार अपने विकास कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण में जुटे हुए हैं।
गृह क्षेत्र बख्तियारपुर का दौरा
इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को अपने गृह क्षेत्र बख्तियारपुर का दौरा किया। यहां उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज, निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) और करजान-ताजपुर पुल परियोजना का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आरओबी का काम अधूरा देखकर मुख्यमंत्री नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि वे बार-बार काम जल्द पूरा करने की हिदायत दे रहे हैं।इसपर अधिकारी हाथ जोड़कर कहते हैं कि सर एक महीना में काम पूरा कर देंगे।इसी दौरान मौजूद कार्यकर्ताओं ने “देश का नेता कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो” के नारे भी लगाए।
करजान-ताजपुर पुल भी लगातार देरी का शिकार
वहीं मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाला करजान-ताजपुर पुल भी लगातार देरी का शिकार हो रहा है। यह परियोजना कई बार तय समय सीमा से पीछे रह चुकी है। अब इसे पूरा करने के लिए वर्ष 2027 की नई समय सीमा तय की गई है।अधिकारियों का दावा है कि परियोजना का लगभग 62 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, हालांकि मौके पर स्थिति इससे अलग नजर आती है।पथ निर्माण विभाग की ओर से भी निर्माण कंपनी को कई बार समय पर काम पूरा करने की चेतावनी दी जा चुकी है। नवयुगा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2011 में की थी और इसे 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन निर्माण कार्य के दौरान कई तकनीकी समस्याओं, स्लैब गिरने की घटनाओं और आर्थिक कठिनाइयों के कारण परियोजना बार-बार पीछे खिसकती चली गई।
परियोजना की लागत भी लगातार बढ़ती गई है
अब तक इस परियोजना की समय सीमा चार बार बढ़ाई जा चुकी है—पहले मई 2016, फिर 2018, उसके बाद मार्च 2020 और फिर मई 2026 तक का लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद काम अधूरा ही है।बता दें कि गंगा नदी पर बनने वाला यह पुल करीब 5.51 किलोमीटर लंबा होगा, जबकि पूरी परियोजना की कुल लंबाई 51.26 किलोमीटर है। इसमें 45.75 किलोमीटर सड़क मार्ग का भी निर्माण किया जाना है। हालांकि कई वर्षों के बाद भी पुल के पिलर के ऊपर स्लैब तक नहीं रखे जा सके हैं।देरी के साथ-साथ इस परियोजना की लागत भी लगातार बढ़ती गई है।
1604 करोड़ से बढ़कर 3923 करोड़ रुपये से अधिक
शुरुआती अनुमान के मुताबिक इसकी लागत 1604 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 3923 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।इस पुल के बन जाने के बाद महात्मा गांधी सेतु और राजेंद्र सेतु पर यातायात का दबाव काफी कम होगा। साथ ही उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन भी काफी आसान और तेज हो जाएगा। फिलहाल लोग इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जल्द पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।













