पराजय से ज़्यादा बुरा है पराजय के उपरांत मैदान छोड़ देना.... समर्थक नहीं टिकते–शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी को घेरा
बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है, जबकि एनडीए ने सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।इस हार के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला ....
बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है, जबकि एनडीए ने सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।इस हार के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हार से ज्यादा गंभीर बात यह है कि नेता हार के बाद मैदान छोड़ दें।
तेजस्वी यादव कोलकाता के लिए रवाना
शिवानंद तिवारी ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में हार के तुरंत बाद तेजस्वी यादव कोलकाता के लिए रवाना हो गए। उन्होंने इसे नेतृत्व की कमजोरी बताते हुए कहा कि ऐसे रवैये से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है। शिवानंद तिवारी ने अपने बयान में यह भी याद दिलाया कि इससे पहले विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी तेजस्वी यादव बिहार छोड़कर यूरोप यात्रा पर चले गए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता संघर्ष के समय मैदान में नहीं टिकते, उनके साथ समर्थक भी लंबे समय तक नहीं जुड़े रहते।
पराजय से ज़्यादा बुरा है पराजय के उपरांत मैदान छोड़ देना
बता दें कि शिवानंद तिवारी ने अपने सोशल मीडिया पर ट्विट कर कहा कि, "पराजय से ज़्यादा बुरा है पराजय के उपरांत मैदान छोड़ देना। सुना है तेजस्वी कोलकाता के लिए निकल गए। इसके पूर्व विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद भी उन्होंने बिहार छोड़ दिया था। बीबी-बच्चों के साथ पिकनिक मनाने के लिए यूरोप की यात्रा पर निकल गए थे। पराजय के बाद रण छोड़ देने वाले नेताओं के साथ उनके समर्थक नहीं टिकते।गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक के वोट नहीं डालने से महागठबंधन को नुकसान हुआ, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब महागठबंधन के भीतर असंतोष और अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं।













