पूर्णिया में भीड़ का कहर: प्रेमी जोड़े को खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटा, जनप्रतिनिधि पर आरोप
कानून को ताक पर रखकर एक प्रेमी जोड़े के साथ न केवल अमानवीय व्यवहार किया गया, बल्कि भीड़ ने उन्हें सरेआम खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटा। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद लोग मदद करने के बजाय इस पूरी घटना का वीडियो बनाते रहे। यह मामला पूर्णिया के कसबा प्रखंड के गुरही पंचायत (वार्ड संख्या 9) का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एक शादीशुदा महिला और दूसरे गांव के युवक के बीच प्रेम संबंध था। बीती रात जब ग्रामीणों ने दोनों को साथ देखा, तो ...
बिहार के पूर्णिया जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां कानून को ताक पर रखकर एक प्रेमी जोड़े के साथ न केवल अमानवीय व्यवहार किया गया, बल्कि भीड़ ने उन्हें सरेआम खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटा। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद लोग मदद करने के बजाय इस पूरी घटना का वीडियो बनाते रहे। यह मामला पूर्णिया के कसबा प्रखंड के गुरही पंचायत (वार्ड संख्या 9) का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एक शादीशुदा महिला और दूसरे गांव के युवक के बीच प्रेम संबंध था। बीती रात जब ग्रामीणों ने दोनों को साथ देखा, तो मामला अचानक उग्र हो गया।
किसी ने उनकी मदद नहीं की
आरोप है कि वार्ड सदस्य की मौजूदगी और कथित शह पर दोनों को खंभे से बांध दिया गया। इसके बाद भीड़ ने युवक और महिला के साथ मारपीट शुरू कर दी। दोनों हाथ जोड़कर रहम की गुहार भी लगा रहे हैं, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इतना ही नहीं, दोनों को गंदी गालियां दी गईं और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जनप्रतिनिधि पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी होती है, वही इस हिंसा में शामिल नजर आ रहा है।
पुलिस और प्रशासन का बयान
घटना के कई घंटे बाद आरोपियों ने ही घायल प्रेमी जोड़े को कसबा पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस का कहना है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और वार्ड सदस्य की भूमिका की भी जांच चल रही है। इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यह घटना न सिर्फ समाज में बढ़ती भीड़ हिंसा की प्रवृत्ति को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक लोग कानून को अपने हाथ में लेकर इंसाफ करने का दावा करते रहेंगे?













