तीसरी बार जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बने उमेश सिंह कुशवाहा, निर्विरोध चुने गए
बिहार में संगठनात्मक चुनाव के बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने एक बार फिर अपने पुराने भरोसे को कायम रखा है। पार्टी ने उमेश सिंह कुशवाहा को लगातार तीसरी बार बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने पर्चा दाखिल नहीं किया, जिसके चलते उन्हें निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष घोषित .....
बिहार में संगठनात्मक चुनाव के बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने एक बार फिर अपने पुराने भरोसे को कायम रखा है। पार्टी ने उमेश सिंह कुशवाहा को लगातार तीसरी बार बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने पर्चा दाखिल नहीं किया, जिसके चलते उन्हें निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। जदयू के संगठनात्मक चुनाव के तहत प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए शुक्रवार को नामांकन की प्रक्रिया हुई। उमेश सिंह कुशवाहा ने इस पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, लेकिन किसी अन्य दावेदार के मैदान में नहीं आने से उनका चयन तय माना जा रहा था। शाम करीब चार बजे पार्टी की ओर से औपचारिक रूप से उनके तीसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनने की घोषणा कर दी गई।
नीतीश कुमार के करीबी और भरोसेमंद
उमेश सिंह कुशवाहा पिछले करीब पांच वर्षों से बिहार में जदयू संगठन की कमान संभाल रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। वर्ष 2021 में उन्हें पहली बार जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय उन्होंने वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह की जगह ली थी। इसके बाद से ही वे लगातार इस पद पर बने हुए हैं और अब तीसरी बार यह जिम्मेदारी उनके हाथों में सौंपी गई है।
नीतीश कुमार का भरोसा
वहीं बिहार की राजनीति में जदयू का एक बड़ा सामाजिक आधार ‘लव-कुश’ समीकरण को माना जाता है, जिसमें कुर्मी और कोइरी समुदाय की अहम भूमिका होती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्मी समाज से आते हैं, जबकि उमेश सिंह कुशवाहा कोइरी समाज से संबंध रखते हैं। ऐसे में पार्टी के सामाजिक संतुलन को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इसी सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक पकड़ की वजह से नीतीश कुमार का भरोसा उन पर लगातार बना हुआ है।
संगठन की मजबूत कड़ी के रूप में देखा जाता है
पार्टी के भीतर उमेश कुशवाहा को संगठन की मजबूत कड़ी के रूप में देखा जाता है। वे लंबे समय से जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में जुटे रहे हैं। खास बात यह भी है कि जब उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े कोइरी नेता ने पार्टी का साथ छोड़ा, तब भी उमेश कुशवाहा नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़े रहे। इससे पार्टी नेतृत्व का भरोसा उन पर और अधिक मजबूत हुआ।राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उमेश सिंह कुशवाहा वैशाली जिले के महनार विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वे 2015 और 2025 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद नीतीश कुमार ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी।













