पटना में आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर दलित संगठनों का प्रदर्शन, जेपी गोलंबर पर पुलिस से झड़प; कई प्रदर्शनकारी डिटेन
राजधानी पटना में मंगलवार को दलित संगठनों के आरक्षण बढ़ाओ-संविधान बचाओ आंदोलन के तहत जमकर हंगामा और प्रदर्शन हुआ। गांधी मैदान से लोकभवन की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प देखने को मिली। बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने खदेड़कर हिरासत में (डिटेन) ले लिया है।
DESWA DESK : राजधानी पटना में मंगलवार को दलित संगठनों के आरक्षण बढ़ाओ-संविधान बचाओ आंदोलन के तहत जमकर हंगामा और प्रदर्शन हुआ। गांधी मैदान से लोकभवन की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प देखने को मिली। बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने खदेड़कर हिरासत में (डिटेन) ले लिया है।
प्रदर्शन की शुरुआत गांधी मैदान से हुई जहां बड़ी संख्या में लोग डॉ. बीआर अंबेडकर और महात्मा गांधी के पोस्टरों के साथ सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण लागू करो और जो दलितों से टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा जैसे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों की योजना गांधी मैदान से निकलकर लोकभवन तक जाने की थी, लेकिन पुलिस ने रणनीतिक स्थानों पर भारी नाकाबंदी कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पटना पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आई। डाकबंगला चौराहे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, जहां लगभग चार सौ पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सिर्फ सामान्य बैरिकेडिंग ही नहीं, बल्कि मेट्रो निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लोहे की शील्ड और कंटीले तारों का भी इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर पर लगाई गई बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे। बैरिकेडिंग लांघकर दूसरी तरफ जाने की कोशिश कर रहे लोगों को पुलिस बल ने खदेड़ा और कई प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं को डिटेन कर लिया।
समिति के संयोजक अमर आजाद ने आंदोलन के उद्देश्यों को बताते हुए कहा कि देश में आज भी दलित और आदिवासी समाज को जाति के आधार पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। कोई व्यक्ति चाहे आईएएस या आईपीएस ही क्यों न बन जाए, उसकी जाति को लेकर उसे निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में भी कुछ लोग एससी-एसटी आरक्षण का विरोध कर रहे हैं जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायपालिका में भी तुरंत आरक्षण लागू किया जाए। साथ ही, बिहार में दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के लिए कुल आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65 फीसदी किया जाए। फिलहाल डाकबंगला चौराहे और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है।













