चिराग पासवान ने मांसाहार विवाद को बताया फालतू,कहा-ये सब बेकार की बातें...कई ज्वलंत विषय हैं जिनपर चर्चा होनी चाहिए

बिहार में पांच साल बाद इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर तमाम पार्टियों ने अपने-अपने हिस्से की तैयारी शुरू कर दी है। वार-पलटवार  के साथ साथ पोस्टर वार भी लगातार हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक  और नवरात्रि के दौरान मीट दुकानों पर बैन पर भी जोरदार राजनीति हो रही है। विपक्षी इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन बीजेपी के नेता इसके पक्ष में हैं। तो वहीं चिराग पासवान..

चिराग पासवान ने मांसाहार विवाद को बताया फालतू,कहा-ये सब बेकार की बातें...कई ज्वलंत विषय हैं जिनपर चर्चा होनी चाहिए
CHIRAG PASWAN


बिहार में पांच साल बाद इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर तमाम पार्टियों ने अपने-अपने हिस्से की तैयारी शुरू कर दी है। वार-पलटवार  के साथ साथ पोस्टर वार भी लगातार हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक  और नवरात्रि के दौरान मीट दुकानों पर बैन पर भी जोरदार राजनीति हो रही है। विपक्षी इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन बीजेपी के नेता इसके पक्ष में हैं। तो वहीं चिराग पासवान ने अपने ही नेताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि कौन कहां नमाज पढ़ेगा, नवरात्रि में दुकानें खुली रहेंगी या बंद रहेंगी, ये सब बेकार की बातें हैं। इस पर चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एनडीए नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और फैसलों के खिलाफ उंगली उठाई है। 

ये सब फालतू की बातें हैं-चिराग पासवान 

दरअसल बीजेपी के नेता छत और सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक और नवरात्रि में मांस की दुकानें बंद करने के पक्ष में हैं। वहीं लोजपा नेता चिराग पासवान  ने अपने ही नेताओं से असहमति जाताते हुए कहा कि कोई जरूरत नहीं दशकों से सब होता आ रहा है। भारत का पुराना इतिहास रहा है जहां हर धर्म से आने वाले लोगों ने भाईचारे के तहत अपने-अपने धर्म का विस्तार करते हुए बहुत ही सहज तरीके से जीवन यापन किया है। ऐसे में कौन कहां नमाज पढ़ेगा और नवरात्रों में मांस की दुकानें बंद रहेगी या खुली, ये सब फालतू की बातें हैं। इसपर कोई चर्चा की गुंजाइश नहीं है। लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की सोच की वजह से समाज में बंटवारा पैदा करने का प्रयास करते हैं जो कतई उचित नहीं है। 

कई ज्वलंत विषय हैं जिनपर चर्चा होनी चाहिए-चिराग पासवान 

चिराग पासवान ने आगे कहा कि कई ज्वलंत विषय हैं जिनपर चर्चा होनी चाहिए। दूसरे के धर्म या किसी भी धर्म पर राजनीतिक दलों को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। ये व्यक्तिगत आस्था का विषय है। मैं मानता हूं कि जिस दिन धार्मिक संगठन, चाहे वो किसी भी धर्म से जुड़ें हो वे राजनीति या राजनीतिक दलों का संरक्षण करना बंद कर दें और जिस दिन राजनेता या राजनीतिक दल धर्म के विषयों में हस्तक्षेप करना बंद कर देंगे तो कम से कम 90 प्रतिशत समस्या वहीं पर हल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब राजनीतिक सोच के साथ इन विवादों को जन्म दिया जाता है ये फालतू है इन सबकी कोई जरूरत नहीं है।