फर्स्ट बिहार झारखंड के फर्जी पत्रकार की घिनौनी साजिश में फंसे परिवहन के कर्मचारी,रिश्वत के रूप में लड़कियों की करता है सप्लाई

बात करते हैं एक ऐसे यूट्यूबर पत्रकार की जिसने पत्रकारिता को शर्मसार कर दिया है। 1st बिहार झरखंड के एक पत्रकार विवेकानंद जो अपने सीनियर के साथ मिलकर कुछ खास खास सरकारी विभागों के कर्मचारियों के बारे में खबरें लिखकर उनसे लाखों रुपए की उगाही करता है। यही नहीं सरकारी विभाग के कर्मचारियों से लाखों रुपये की उगाही करने के लिए विवेकानंद उस विभाग के वरीय अधिकारियों को रिश्वत के ....

फर्स्ट बिहार झारखंड के फर्जी पत्रकार की घिनौनी साजिश में फंसे परिवहन के कर्मचारी,रिश्वत के रूप में लड़कियों की करता है सप्लाई
youtube journalist vivekananda

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, जो जनमत को आकार देने, विकास को गति देने और सत्ता को जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लेकिन वहीं उसका कोई अपने स्वार्थसिद्धी के लिए गलत इस्तेमाल करने लगे तो उसे क्या कहा जाएगा। बात करते हैं एक ऐसे यूट्यूबर  पत्रकार की जिसने पत्रकारिता को शर्मसार कर दिया है।  1st बिहार झरखंड के एक पत्रकार विवेकानंद  जो  अपने सीनियर के साथ मिलकर कुछ खास खास सरकारी विभागों के कर्मचारियों के बारे में खबरें लिखकर उनसे लाखों रुपए की उगाही करता है। यही नहीं सरकारी विभाग के कर्मचारियों से लाखों रुपये की उगाही करने के लिए विवेकानंद उस विभाग के वरीय अधिकारियों को रिश्वत के रूप में लड़कियों की सप्लाई  भी करता है। वहीं  देसवा न्यूज ने  1st बिहार झरखंड के पत्रकार विवेकानंद के बारे में एक स्टोरी चलायी थी जिसमें यह  बताया गया  था की विवेकानंद किस किस्म का आशिकमिजाज है। 

पत्रकार विवेकानंद जैसे यूटुबर का क्या कस है ? 

बता दें कि विवेकानंद के द्वारा ये बताया गया कि बिहार के एक अधिकारी के यहाँ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी ने जांच कर  कार्रवाई की। उस अधिकारी के यहाँ हुई  छापेमारी की कार्रवाई के करीब 10 दिनों के बाद संबंधित विभाग ने उस अधिकारी को निलंबित कर दिया। देशवा न्यूज और देशवा बिहार झारखंड देशवा ट्रांसपोर्ट न्यूज को सूत्रों ने जो बताया उन्हीं के हवाले से ये बता दें कि  आज के समय में इस घाघ किस्म के ब्लैकमेलर पत्रकार विवेकमंद जैसे यूटुबर का क्या कस है ? ये लोग "भेड़ कि खाल में छुपे हुए भेड़िये हैं" बता दें कि  ब्लैकमेलर विवेकानंद ने इस न्यूज को जब पब्लिश किया था तो उस समय इस न्यूज में परिवहन विभाग के दो अन्य अधिकारियों के नाम थे । जिसके बारे में ये डिमांड कर रहा था कि इनको निलंबित किया जाए। अब सोचने वाली बात ये है कि एक पत्रकार का काम क्या है। खबर दिखाना या किसी  को फंसाकर उस के लिए सजा की माँग करना, वो भी तब जब मामला किसी जांच एजेंसी के पास हो या न्यायालय में लंबित हो ?

विवेकानंद ने उनका कॉल नहीं उठाया

जब विवेकानंद के द्वारा उन दो अधिकारियों के नाम के साथ उनके निलंबन की मांग इस न्यूज के माध्यम से की गई तो उसमें से एक अधिकारी ने विवेकानंद को फोन किया। विवेकानंद ने उनका कॉल नहीं उठाया। व्हाट्सऐप के माध्यम से कुछ बातचीत जरुर हुई । दरअसल  विवेकानंद ने पहले भी उस अधिकारी का आर्थिक शोषण किया है वो अधिकारी दलित समु‌दाय से हैं और विवेकानंद के साथ आर्थिक शोषण ,जाति सूचक अपमान जनित शब्दों से त्रस्त होकर उन्होंने देशवा न्यूज़ से संपर्क किया और अपनी सारी आपबीती बताई। उन्होंने  विवेकानंद  से हुई सारे व्हाट्सऐप चैट को भी उपलब्ध कराया ।  

अधिकारी ने बार बार फोन किया 

बता दें जब उस अधिकारी ने बार बार फोन किया उनको व्हाट्सएप पर मैसेज दिया तो 1st बिहार झारखंड के लिए काम करने वाला ये ब्लैकमेलर विवेकानंद ने उस रात में ही खबर से उस दलित अधिकारी का नाम हटा दिया और एक अधिकारी का नाम रहने दिया। वहीं पिछली खबर के ठीक एक दिन बाद यानी 19/3/2025 को  1st बिहार झारखंड में छपी इस खबर में भी सबसे पहले रेड अंडरलाइन पर नजर डालिए जहां पिछली खबर में विवेकानंद का नाम हुआ करता है वहां से उसका नाम गायब है और इस पूरी खबर में इस बार किसी अधिकारी का नाम नहीं है और वे बात कर रहे हैं परिवहन मंत्री महोदया की जहां इस बार ये ब्लैकमेलर पत्रकार विवेकानंद पर्दे के पीछे है और इस न्यूज को बनाने में इस संस्थान के जो भी सीनियर है। उनको बराबर का सहयोग कर रहे हैं।

फिफ्टी परसेंट अपने सीनियर्स को दे देता है 

बता दें कि विवेकानंद के द्वारा जो ये दावा किया जाता है कि उसके द्वारा परिवहन विभाग से जो 21/21 लाख रुपये की रंगदारी वसूली जा रही है उसमें से वो फिफ्टी परसेंट अपने सीनियर्स को दे देता है ।देशवा न्यूज के सूत्रों ने जो बताया उस आधार पर सत्य प्रमाणित प्रतीत होता है। यह सब देखते हुए एक सवाल बार बार उठ रहा है कि क्या किसी के द्वारा कोई आरोप लगाने के बाद अगर कोई जांच एजेंसी किसी के यहाँ अपनी जांच कार्य के लिए जाती है तो क्या जांच एजेंसी के इस एकमात्र कार्य से वो सम्बंधित अधिकारी दोषी हो जाता है? ध्यान देने वाली बात है की मामला अभी अनुसंधान में है। भारत का कानून क्या कहता है जब तक कोई व्यक्ति माननीय न्यायालय द्वारा दोषी नहीं ठहराया जाता आप उसके लिए सजा की माँग कैसे कर सकते हैं?