बिहार चुनाव से पहले नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, एस. सिद्धार्थ को मिली नई जिम्मेदारी

बिहार चुनाव से पहले बिहार सरकार ने शनिवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) डॉ. एस. सिद्धार्थ का ट्रांसफर कर उन्हें राज्य का विकास आयुक्त बनाया गया है। उनकी जगह 1995 बैच के आइएएस अधिकारी डॉ. बी. राजेंद्र को शिक्षा विभाग का नया एसीएस नियुक्त किया गया है।1991 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. एस. सिद्धार्थ वर्तमान में शिक्षा विभाग के एसीएस के साथ-साथ कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल ....

बिहार चुनाव से पहले नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, एस. सिद्धार्थ को मिली नई जिम्मेदारी

बिहार चुनाव से पहले बिहार सरकार ने शनिवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) डॉ. एस. सिद्धार्थ का ट्रांसफर कर उन्हें राज्य का विकास आयुक्त बनाया गया है। उनकी जगह 1995 बैच के आइएएस अधिकारी डॉ. बी. राजेंद्र को शिक्षा विभाग का नया एसीएस नियुक्त किया गया है।1991 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. एस. सिद्धार्थ वर्तमान में शिक्षा विभाग के एसीएस के साथ-साथ कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अब उन्हें विकास आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं एक सितंबर से ही मौजूदा विकास आयुक्त प्रत्यय अमृत राज्य के मुख्य सचिव का पदभार संभालेंगे।

अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ
वहीं, प्रशासनिक फेरबदल में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर को वन एवं पर्यावरण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा अरविंद कुमार चौधरी को मंत्रिमंडल सचिवालय का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।

एस. सिद्धार्थ की अनोखी पहल
वहीं बता दें कि बिहार शिक्षा विभाग ने स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए एक अनोखी पहल की थी, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा था। विभाग ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए स्कूलों की निगरानी शुरू की, जिसे देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग माना गया। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) पद पर रहते हुए डॉ. एस. सिद्धार्थ ने खुद इस पहल की शुरुआत की थी। वे अचानक स्कूलों को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल करते और सीधे वहां की स्थिति का जायजा लेते। इस दौरान वे स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, कक्षाओं में पढ़ाई की व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों की स्थिति की लाइव रिपोर्ट लेते थे।