प्रशांत किशोर ने जेडीयू के मुसलमानों नेताओं से की अपील,कहा-जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ ...छोड़ दें नीतीश का साथ

लोकसभा में आज सोमवार दोपहर वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया गया।  इस विधेयक को लेकर देशभर में चर्चाएं हो रही हैं। जहां कई लोग इसका समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कई लोग इसका जोरदार विरोध भी कर रहे हैं। वहीं लोकसभा में वक्फ संसोधन बिल पर चर्चा के बीच बिहार का सियासी पारा गर्माया हुआ है। इसी कड़ी में प्रशांत किशोर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत...

प्रशांत किशोर ने जेडीयू के मुसलमानों नेताओं से की अपील,कहा-जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ ...छोड़ दें नीतीश का साथ
Prashant Kishor

लोकसभा में आज सोमवार दोपहर वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया गया।  इस विधेयक को लेकर देशभर में चर्चाएं हो रही हैं। जहां कई लोग इसका समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कई लोग इसका जोरदार विरोध भी कर रहे हैं। वहीं लोकसभा में वक्फ संसोधन बिल पर चर्चा के बीच बिहार का सियासी पारा गर्माया हुआ है। इसी कड़ी में प्रशांत किशोर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान वक्फ बिल को लेकर जेडीयू पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल संसद से पारित होता है तो बीजेपी से ज्यादा नीतीश की पार्टी इसके लिए जिम्मेदार होगी। नीतीश के सांसदों को सदन में इस बिल पर वोट नहीं करना चाहिए। 

वे वक्फ बिल के खिलाफ वोट करें-पीके

वहीं उन्होंने यह भी कहा कि जेडीयू के मुस्लिम नेताओं को भी अपने सांसदों से यह अपील करनी चाहिए कि वे वक्फ बिल के खिलाफ वोट करें। बता दें कि प्रशांत किशोर ने सीएम नीतीश की पार्टी जेडीयू से इस बिल पर समर्थन नहीं करने की अपील की। उन्होंने जेडीयू के मुसलमान नेताओं से कहा है कि अगर यह बिल संसद से पारित हो जाता है तो उन्हें नीतीश का साथ छोड़ देना चाहिए। क्योंकि, मुसलमानों की वजह से ही 2015 में नीतीश बिहार का चुनाव जीतकर सीएम बने थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर मुस्लिम नहीं होते तो नीतीश की राजनीति खत्म हो जाती।

जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ -पीके

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह बिल मुसलमानों को सीधे प्रभावित करता है। सरकार अगर मुस्लिम समुदाय को भरोसे में लिए बिना वक्फ कानून बनाती है तो यह पूरी तरह से गलत होगा। संविधान में अल्पसंख्यकों दिए गए अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप, उस समाज की सहमति के बिना उचित नहीं है।