पीएम मोदी के नीदरलैंड बयान पर रोहिणी आचार्य का हमला, बोलीं- 2014 से ही शुरू हो गया था संकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान दिए गए बयान पर सियासत तेज हो गई है। आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya )ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया को...

पीएम मोदी के नीदरलैंड बयान पर रोहिणी आचार्य का हमला, बोलीं- 2014 से ही शुरू हो गया था संकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान दिए गए बयान पर सियासत तेज हो गई है। आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya )ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया को गरीबी का खतरा बताने से पहले केंद्र सरकार को देश के हालात पर ध्यान देना चाहिए।

दरअसल, पीएम मोदी ने नीदरलैंड की राजधानी The Hague में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा था कि दुनिया इस समय महामारी, युद्ध और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर हालात नहीं सुधरे तो दुनिया की बड़ी आबादी गरीबी की चपेट में आ सकती है और पिछले कई दशकों की उपलब्धियां प्रभावित हो सकती हैं।

 में संकट की शुरुआत 26 मई 2014 से ही हो गई थी

प्रधानमंत्री के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत में संकट की शुरुआत 26 मई 2014 से ही हो गई थी और अब स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

रोहिणी ने कहा कि देश की बड़ी आबादी आज भी मुफ्त राशन पर निर्भर है। उनके मुताबिक करोड़ों लोग हर महीने मिलने वाले पांच किलो अनाज के सहारे जीवन गुजार रहे हैं, जो यह दिखाता है कि गरीबी अब भी देश में बड़ी समस्या बनी हुई है। उन्होंने विश्व बैंक और नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि करोड़ों भारतीय अब भी गरीबी रेखा के नीचे या उसके आसपास जीवन जी रहे हैं।

चुनावी मंचों पर गरीबी कम ही चर्चा का विषय बनती है,

आरजेडी नेता ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब देश के भीतर गरीबी और भुखमरी जैसे मुद्दे मौजूद हैं, तब विदेशों में जाकर गरीबी पर बड़ी बातें करना लोगों को हैरान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी मंचों पर गरीबी कम ही चर्चा का विषय बनती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे प्रमुख मुद्दा बनाया जाता है।

फिलहाल, प्रधानमंत्री के बयान और रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।