सुपौल के अवर निबंधक पर शिकंजा, बंगाल तक फैला ‘किलानुमा’ संपत्ति का जाल

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में सुपौल के जिला अवर निबंधक अमरेंद्र कुमार की संपत्ति का जाल..

सुपौल के अवर निबंधक पर शिकंजा, बंगाल तक फैला ‘किलानुमा’ संपत्ति का जाल

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में सुपौल के जिला अवर निबंधक अमरेंद्र कुमार की संपत्ति का जाल अब राज्य की सीमाओं को पार करता दिख रहा है। ताजा छानबीन में पश्चिम बंगाल तक फैले करोड़ों के निवेश का सुराग मिला है, जिसने जांच को और तेज कर दिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा की गई छापेमारी में लगातार चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच टीम को मिले ताजा इनपुट के अनुसार, अमरेंद्र कुमार ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा इलाके में एक बड़ा भूखंड खरीदा है।

अनुमानित बाजार कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये 

सूत्रों के मुताबिक, यह जमीन ‘दार्जिलिंग व्यू सोसाइटी’ में स्थित है और करीब 30 से 35 कट्ठा क्षेत्र में फैली हुई है। इस प्रॉपर्टी की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जिसे अमरेंद्र कुमार ने अपने नाम पर पंजीकृत करवा रखा है। जांच में सबसे हैरान करने वाला पहलू इस जमीन की घेराबंदी को लेकर सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, केवल बाउंड्री वॉल पर ही करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह बाउंड्री साधारण नहीं, बल्कि किलानुमा संरचना के रूप में तैयार की गई है, जो इस निवेश की भव्यता और गंभीरता को दर्शाती है।

अवैध कमाई का इस्तेमाल किया गया है

EOU अब इस पूरे निवेश के वित्तीय स्रोत की गहन जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस संपत्ति की खरीद में अवैध कमाई का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए बैंकिंग ट्रांजेक्शन, रजिस्ट्री दस्तावेज और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।जांच एजेंसी अब बागडोगरा स्थित इस संपत्ति के भौतिक सत्यापन की तैयारी में है। साथ ही स्थानीय संपर्कों और संभावित बेनामी निवेश की भी जांच की जा सकती है। सूत्रों का मानना है कि आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में किए गए निवेश और छिपी संपत्तियों का भी खुलासा हो सकता है। अमरेंद्र कुमार के खिलाफ मिल रहे लगातार सबूत उनकी मुश्किलें बढ़ाते जा रहे हैं। ‘किलानुमा’ भूखंड के इस खुलासे ने न सिर्फ विभाग में हलचल मचा दी है, बल्कि यह भी संकेत दे दिया है कि जांच अभी और बड़े खुलासे कर सकती है।