बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर- निर्देशक मनोज कुमार का निधन,क्रांति में दिलीप कुमार को किया था डायरेक्ट, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर, फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, गीतकार और संपादक मनोज कुमार का सतासी साल  की उम्र में आज सुबह निधन हो गया। आज सुबह उन्होंने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। मनोज कुमार विशेष रूप से अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जाते थे। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें "भारत कुमार" के नाम से खास पहचान मिली थी। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया था..

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर- निर्देशक मनोज कुमार का निधन,क्रांति में दिलीप कुमार को किया था डायरेक्ट, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
Bollywood actor Manoj Kumar

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर, फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, गीतकार और संपादक मनोज कुमार का सतासी साल  की उम्र में आज सुबह निधन हो गया। आज सुबह उन्होंने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। मनोज कुमार विशेष रूप से अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जाते थे। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें "भारत कुमार" के नाम से खास पहचान मिली थी। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया था, जिसमें पूरब और पश्चिम आज भी दर्शकों के दिल के करीब है। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार, दादा साहब फाल्के, पद्म श्री पुरस्कार और 8 फिल्मफेयर पुरस्कार जीता था। मनोज कुमार के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।

फिल्म फैशन से करियर की शुरुआत 

जानकारी के लिए बता दें कि मनोज कुमार ने साल 1957 में फिल्म फैशन से अपने करियर की शुरुआत की थी। वहीं साल 1960 में मनोज कुमार को बतौर लीड एक्टर फिल्म कांच की गुड़िया में मौका मिला था और पहचान साल 1962 में आई फिल्म हरियाली और रास्ता में काम करने के बाद उन्हें मिली थी। वहीं 1965 में मनोज कुमार देशभक्ति पर बनी फिल्म शहीद में स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के रोल में नजर आए थे। फिल्म जबरदस्त हिट रही और इसके गाने 'ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी कसम', 'सरफरोशी की तमन्ना' और 'मेरा रंग दे बसंती चोला' काफी पसंद किए गए थे।

लाल बहादुर शास्त्री ने फिल्म बनाने की दी सलाह

बता दें कि शहीद फिल्म लाल बहादुर शास्त्री को बेहद पसंद आई। शास्त्री जी का नारा था- जय जवान, जय किसान। उन्होंने मनोज कुमार को इस नारे पर फिल्म बनाने की सलाह दी। इस पर मनोज ने फिल्म उपकार (1967) बनानी शुरू कर दी, हालांकि उस वक्त तक उन्हें फिल्म लेखन या डायरेक्शन का कोई अनुभव नहीं था। कहा जाता है कि एक दिन मनोज कुमार ने मुंबई से दिल्ली जाने के लिए राजधानी ट्रेन की टिकट खरीदी और ट्रेन में चढ़ गए। ट्रेन में बैठे-बैठे ही उन्होंने आधी फिल्म लिखी और लौटते हुए आधी। इस फिल्म से उन्होंने बतौर डायरेक्टर करियर की दूसरी पारी शुरू की। आगे उन्होंने पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान जैसी देशभक्ति पर कई फिल्में बनाईं। उपकार 1967 की सबसे बड़ी फिल्म थी। फिल्म का गाना मेरे देश की धरती सोना उगले.. आज भी सबसे बेहतरीन देशभक्ति गानों में गिना जाता है।

नाम बदलने के पीछे की कहानी 

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को पाकिस्तान में एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था, हालांकि बाद में उन्होंने अपना नाम बदल कर मनोज रख लिया। उनके नाम बदलने के पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है। उन्होंने बचपन में फिल्म शबनम देखी थी, जिसमें दिलीप कुमार और कामिनी कौशल ने लीड रोल निभाया था। उस फिल्म में दिलीप कुमार के किरदार का नाम मनोज था। इस फिल्म में एक्टर से मनोज कुमार बहुत प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर मनोज कुमार कर लिया।  आगे चलकर मनोज कुमार ने अपने निर्देशन में बनी फिल्म क्रांति (1981) में दिलीप कुमार को डायरेक्ट किया था। 

पीएम मोदी ने मनोज कुमार को दी श्रद्धांजलि

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर मनोज कुमार को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने 'एक्स' पर लिखा है-'महान अभिनेता और फिल्म निर्माता श्री मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुख हुआ। वह भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें विशेष रूप से उनकी देशभक्ति के उत्साह के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फिल्मों में भी झलकता था। मनोज जी के कार्यों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रज्वलित किया और यह पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।'