पटना के बाढ़ में मासूम से दरिंदगी: मेले में मां से बिछड़ी 3 साल की बच्ची मिली खून से लथपथ

समाज के सामने एक बार फिर वही कड़वा सवाल खड़ा है—क्या हमारी बेटियां सच में सुरक्षित हैं? पटना के बाढ़ से सामने आई यह दर्दनाक घटना न सिर्फ इंसानियत को झकझोरती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून के असर पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।जानकारी के मुताबिक, भदौर थाना क्षेत्र में एक 3 साल की बच्ची अपनी मां के साथ चैती मेले में गई थी। भीड़भाड़ के बीच वह अपनी मां से बिछड़ गई। परिजनों ने हर संभव कोशिश की, लेकिन कुछ.....

पटना के बाढ़ में मासूम से दरिंदगी: मेले में मां से बिछड़ी 3 साल की बच्ची मिली खून से लथपथ

समाज के सामने एक बार फिर वही कड़वा सवाल खड़ा है—क्या हमारी बेटियां सच में सुरक्षित हैं? पटना के बाढ़ से सामने आई यह दर्दनाक घटना न सिर्फ इंसानियत को झकझोरती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून के असर पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।जानकारी के मुताबिक, भदौर थाना क्षेत्र में एक 3 साल की बच्ची अपनी मां के साथ चैती मेले में गई थी। भीड़भाड़ के बीच वह अपनी मां से बिछड़ गई। परिजनों ने हर संभव कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर बाद बच्ची मेला स्थल से करीब 50 मीटर दूर एक मंदिर के पीछे गंभीर रूप से घायल खून से लथपथ अवस्था में मिली।

नजदीकी अस्पताल ले जाया गया
बच्ची की हालत इतनी नाजुक थी कि वह कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थी। तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, मामला मंगलवार देर रात का है। बुधवार को बच्ची का मेडिकल हुआ और अभी एनएमसीएच में उसका इलाज चल रहा है।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मेडिकल जांच कराई गई है और एफएसएल टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि, अब तक आरोपी की पहचान नहीं हो पाई है।

परिजन ने पुलिस को सूचना दी
मंगलवार देर रात अस्पताल ले जाने के बाद परिजन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो बच्ची से पूछताछ की कोशिश की, पर पुलिस को आरोपी के बारे में पता नहीं चला। परिजन ने थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है, जिसमें किसी पर संदेह नहीं जताया है। पुलिस से जल्द कार्रवाई की मांग की है।थाना अध्यक्ष शत्रुघ्न कुमार ने कहा कि परिजनों ने लिखित आवेदन दिया है। उनके अनुसार, बच्ची मेला देखने के दौरान बिछड़ गई थी और बाद में मंदिर के पीछे खून से लथपथ मिली। पुलिस ने बच्ची को जांच के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेजा था। एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून निकल रहा था।

समाज के सामने एक बड़ा आईना है
बता दें कि यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा आईना है। बढ़ते अपराध, खासकर मासूम बच्चियों के खिलाफ, यह सवाल उठाते हैं कि आखिर हमारी सुरक्षा व्यवस्था में कमी कहां है?कड़े कानून होने के बावजूद अपराधियों के हौसले क्यों बुलंद हैं? क्या सिर्फ कानून बनाना काफी है, या फिर उनकी सख्ती से लागू करना भी उतना ही जरूरी है? वहीं परिवार, प्रशासन और समाज इन तीनों की जिम्मेदारी भी बनती है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि कोई भी बच्ची इस तरह की हैवानियत का शिकार न बने।सिर्फ दुख जताना काफी नहीं—जरूरत है ठोस कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने की।