जहानाबाद नीट छात्रा मौत केस: पर्सनल डायरी से खुलने वाला है सबसे बड़ा राज, SIT को मिला अहम सुराग

जहानाबाद की नीट छात्रा की रहस्यमयी मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परतें खुलती जा रही हैं। अब तक का सबसे अहम सुराग एसआईटी के हाथ लगा है—छात्रा की पर्सनल डायरी। सूत्रों के मुताबिक, यह वही डायरी है जिसमें छात्रा रोज़मर्रा की ज़िंदगी, पढ़ाई का दबाव, पारिवारिक रिश्ते और पटना आने के बाद आए मानसिक बदलावों को विस्तार से दर्ज करती थी।डायरी .....

जहानाबाद नीट छात्रा मौत केस: पर्सनल डायरी से खुलने वाला है सबसे बड़ा राज, SIT को मिला अहम सुराग

जहानाबाद की नीट छात्रा की रहस्यमयी मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परतें खुलती जा रही हैं। अब तक का सबसे अहम सुराग एसआईटी के हाथ लगा है—छात्रा की पर्सनल डायरी। सूत्रों के मुताबिक, यह वही डायरी है जिसमें छात्रा रोज़मर्रा की ज़िंदगी, पढ़ाई का दबाव, पारिवारिक रिश्ते और पटना आने के बाद आए मानसिक बदलावों को विस्तार से दर्ज करती थी।डायरी के कई पन्ने इस ओर इशारा करते हैं कि छात्रा किसी एक झटके से नहीं, बल्कि लंबे समय से बढ़ते मानसिक तनाव से गुजर रही थी। यह तनाव कैसे और किन परिस्थितियों में गहराता गया—इन्हीं सवालों के जवाब अब जांच का केंद्र बन गए हैं। डायरी मिलने के बाद माना जा रहा है कि मामले में जल्द बड़ा खुलासा संभव है।

आख़िरी कॉल, स्लीप मोड और अनसुलझे सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रा ने अपनी आख़िरी कॉल रात करीब 9 बजे अपनी मां को की थी। इसके बाद उसका मोबाइल फोन स्लीप मोड में चला गया और फिर किसी तरह की गतिविधि दर्ज नहीं हुई। फोन अपने आप स्लीप मोड में गया या किसी ने किया—इस बिंदु पर टेक्निकल टीम गहराई से जांच कर रही है। छात्रा के चैट और कॉल पैटर्न को भी खंगाला जा रहा है ताकि घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा सकें।एसआईटी की टेक्निकल टीम को एक संवेदनशील चैट हिस्ट्री भी हाथ लगी है। यह चैट 6 से 9 जनवरी के बीच की बताई जा रही है, जिसमें दो डॉक्टरों और केस से जुड़े एक व्यक्ति के बीच बातचीत दर्ज है। चैट में कथित तौर पर यह कहा गया है कि पुलिस को सूचना न दी जाए और मामले को वहीं तक सीमित रखा जाए।

फॉरेंसिक, मेडिकल और डीएनए रिपोर्ट का इंतज़ार
इस इनपुट के बाद सोमवार को एक सीनियर डॉक्टर को थाने बुलाकर घंटों पूछताछ की गई। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या किसी स्तर पर तथ्यों को दबाने या जांच को प्रभावित करने की कोशिश हुई।सीआईडी के एडीजी पारसनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एफएसएल की टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक सैंपल एकत्र कर चुकी है। मामले की साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन की जा रही है और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपे जाने की बात कही गई है।

डीएनए जांच के नतीजों का इंतज़ार
एडीजी ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया जारी होने के कारण फिलहाल किसी निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। एम्स की मेडिकल रिपोर्ट और डीएनए जांच के नतीजों का इंतज़ार है। पुलिस का दावा है कि रिपोर्ट आते ही कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और आगे की कार्रवाई तेज़ की जाएगी।बता दें कि यह मामला न केवल एक छात्रा की मौत का है, बल्कि सिस्टम, संवेदनशीलता और जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है। एसआईटी हर पहलू से जांच कर रही है—डायरी के शब्दों से लेकर डिजिटल फुटप्रिंट और फॉरेंसिक साक्ष्यों तक। अब नज़रें उन रिपोर्टों पर टिकी हैं, जिनसे इस रहस्य पर से पर्दा उठने की उम्मीद है।