पटना में पिंक बस बनी महिलाओं की पहली पसंद, हर 10 मिनट में मिल रही सुविधा
पटना की सड़कों पर अब महिलाओं की यात्रा सिर्फ मंज़िल तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। शहर के भीतर महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर देने के उद्देश्य से शुरू की गई पिंक बस सेवा अब राजधानी में तेज़ी से लोकप्रिय होती जा रही है।बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के आंकड़े इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। पिछले आठ महीनों....
पटना की सड़कों पर अब महिलाओं की यात्रा सिर्फ मंज़िल तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। शहर के भीतर महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर देने के उद्देश्य से शुरू की गई पिंक बस सेवा अब राजधानी में तेज़ी से लोकप्रिय होती जा रही है।बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के आंकड़े इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। पिछले आठ महीनों में 21 हजार से अधिक महिलाएं पिंक बस से सफर कर चुकी हैं, जो यह साबित करता है कि महिलाएं अब सार्वजनिक परिवहन में खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
नेहरू पथ बना पिंक बस का सबसे व्यस्त रूट
गांधी मैदान से नेहरू पथ के बीच पिंक बस सेवा महिलाओं की पहली पसंद बनती जा रही है। जेडी वीमेंस कॉलेज, शेखपुरा मोड़, पटना हाईकोर्ट और पटना जू जैसे प्रमुख स्थानों पर अब महिलाएं ऑटो छोड़कर पिंक बस का इंतजार करती दिखती हैं।स्थिति यह है कि नेहरू पथ पर लगभग हर 10 मिनट में एक पिंक बस उपलब्ध हो जाती है, जिससे महिलाओं को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता और उनका समय भी बचता है।
20 बसों से 35 बसों तक का सफर
पिंक बस सेवा की शुरुआत मई 2025 में पहले चरण में 20 बसों के साथ की गई थी। इनमें से आठ बसें पटना के लिए और बाकी अन्य जिला मुख्यालयों के लिए चलाई गई थीं।बढ़ती मांग को देखते हुए नवंबर 2025 में सेवा का विस्तार किया गया और फिलहाल राजधानी पटना में 35 पिंक बसें संचालित हो रही हैं। अन्य जिला मुख्यालयों में भी पांच-पांच बसें चलाई जा रही हैं, जिससे महिला यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
अब शहर नहीं, अनुमंडलों तक पहुंची पिंक बस
पिंक बस सेवा अब सिर्फ शहरी सीमा तक सीमित नहीं रही। दनियावां, दुल्हिनबाजार, फतुहा, मनेर और पुनपुन जैसे अनुमंडलों से भी महिलाएं पिंक बस के जरिए पटना आ-जा रही हैं।इसके साथ ही पटना से हाजीपुर तक पिंक बस सेवा शुरू होने से कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को बड़ी राहत मिली है।परिवहन विभाग ने पिंक बस सेवा को लेकर नियम भी स्पष्ट कर दिए हैं। महिलाएं अपने साथ अधिकतम पांच साल तक के बच्चे को ही पिंक बस में ले जा सकती हैं। पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों को इस सेवा में यात्रा की अनुमति नहीं दी गई है। यह व्यवस्था बस में अनुशासन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर लागू की गई है।
अब महिलाओं के हाथों में पिंक बस की कमान
इतना ही नहीं पिंक बस सेवा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा 10 महिला चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इनमें से 5 से 6 महिला चालक पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं, जो गणतंत्र दिवस पर गांधी मैदान में निकलने वाली निगम की झांकी में पिंक बस चलाती नजर आएंगी। यह पहली बार होगा जब पिंक बस की कमान महिलाओं के हाथों में दिखाई देगी।
सिर्फ सफर नहीं, आत्मविश्वास की उड़ान
पिंक बस सेवा ने पटना की महिलाओं को सिर्फ सुरक्षित सफर का विकल्प नहीं दिया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और स्वतंत्रता को भी नई ताकत दी है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या इस बात का सबूत है कि महिलाएं अब सार्वजनिक परिवहन में खुद को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सशक्त महसूस कर रही हैं।













