औरंगाबाद में विजिलेंस का छापा: दाउदनगर अनुमंडल अस्पताल का प्रधान लिपिक 2 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार
औरंगाबाद जिले के दाउदनगर अनुमंडल अस्पताल में सोमवार को विजिलेंस विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रधान लिपिक बृजमोहन लाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर अस्पताल में कार्यरत जीएनएम से उपस्थिति और कैजुअल लीव (सीएल) से जुड़े कार्यों के बदले अवैध रूप से पैसे मांगने का आरोप...
औरंगाबाद जिले के दाउदनगर अनुमंडल अस्पताल में सोमवार को विजिलेंस विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रधान लिपिक बृजमोहन लाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर अस्पताल में कार्यरत जीएनएम से उपस्थिति और कैजुअल लीव (सीएल) से जुड़े कार्यों के बदले अवैध रूप से पैसे मांगने का आरोप है।
योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की
जानकारी के अनुसार, 6 सदस्यीय विजिलेंस टीम ने अनुमंडल अस्पताल परिसर में योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। इस दौरान प्रधान लिपिक बृजमोहन लाल को जीएनएम अर्चना कुमारी से 2,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। बताया गया कि आरोपी ने पहले 3,000 रुपए की मांग की थी, लेकिन बाद में सौदा 2,000 रुपए में तय हुआ।पीड़ित जीएनएम अर्चना कुमारी ने इस संबंध में निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि प्रधान लिपिक अटेंडेंस बनाने और सीएल से जुड़े कार्यों के बदले लगातार पैसे की मांग कर रहा था।
विजिलेंस विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। विजिलेंस डीएसपी आदित्य राज ने बताया कि मामले के सत्यापन की जिम्मेदारी निगरानी सिपाही राहुल कुमार को सौंपी गई थी। सत्यापन के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि प्रधान लिपिक द्वारा लगातार रिश्वत मांगी जा रही थी। इसके बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई को अंजाम दिया।
जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य
योजना के तहत सोमवार को जैसे ही जीएनएम अर्चना कुमारी ने आरोपी को 2,000 रुपए दिए, विजिलेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया। छापेमारी के दौरान टीम ने एक उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) भी जब्त किया है, जिसे जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। इस रजिस्टर की जांच से यह पता लगाया जाएगा कि क्या इससे पहले भी स्वास्थ्य कर्मियों से इसी तरह अवैध वसूली की जाती रही है।
शिकायतकर्ता का आरोप:
अर्चना कुमारी ने बताया कि अस्पताल में छोटे-छोटे कार्यालयी कार्यों के लिए भी पैसों की मांग की जाती थी। सीएल भरने के नाम पर कई स्वास्थ्य कर्मियों से रुपये वसूले गए। पैसा नहीं देने पर लिपिक और कुछ अन्य स्टाफ द्वारा अपमानित किए जाने की बातें भी सामने आई हैं।विजिलेंस डीएसपी आदित्य राज ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। पूछताछ के बाद मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस विभाग की सख्त नीति का एक और उदाहरण मानी जा रही है।













