मांझी का तंज –जब पैसा लेकर टिकट बेचिएगा तो....., कांग्रेस vs मांझी आमने-सामने, दगाबाज बलमा बयान से गरमाई राजनीति

बिहार में सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमा लिया। इस जीत ने राज्य की राजनीति में NDA की मजबूती को एक बार फिर साबित कर दिया है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने 44-44 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं JDU के रामनाथ ठाकुर और RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा  को 42-42 वोट मिले....

मांझी का तंज –जब पैसा लेकर टिकट बेचिएगा तो....., कांग्रेस vs मांझी आमने-सामने, दगाबाज बलमा बयान से गरमाई राजनीति

बिहार में सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमा लिया। इस जीत ने राज्य की राजनीति में NDA की मजबूती को एक बार फिर साबित कर दिया है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने 44-44 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं JDU के रामनाथ ठाकुर और RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा  को 42-42 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को पहले दौर में 30 वोट मिले, लेकिन दूसरी वरीयता के आधार पर उन्होंने RJD के एडी सिंह  को हराकर जीत हासिल कर ली।

गायब विधायकों पर सियासी तंज
बता दें कि इस चुनाव में NDA के सभी 202 विधायकों ने मतदान किया, जबकि महागठबंधन के सिर्फ 37 विधायक ही वोट डाल पाए। जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे,लेकिन महागठबंधन के चार विधायकों की गैरमौजूदगी ने उसकी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। महागठबंधन के विधायकों के गायब रहने को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी  ने तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा कि “जब पैसा लेकर टिकट बेचिएगा तो माननीय विधायक फोन नहीं ऑफ करेंगे तो क्या करेंगे।”उन्होंने अपने पोस्ट में तेजस्वा यादव और राहुल गांधी  को भी टैग किया।हम (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने इस जीत को NDA की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जो गठबंधन अपने विधायकों को एकजुट नहीं रख सकता, उसकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठना लाजिमी है।

कांग्रेस का पलटवार
वहीं बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने जीतन राम मांझी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी सीएम रह चुके हैं। नीतीश कुमार ने त्याग करके उन्हें सीएम बनाया था। बाद में वह नीतीश कुमार को दगा दे गए। 'दगाबाज बलमा बतिया क्या माने' लाइन उन पर सूट करती है। इसके बाद घुसकर महागठबंधन में आ गए फिर एनडीए में चले गए। मैं उनसे एक सवाल करता हूं कि आखिर जीतन राम मांझी की पार्टी कैसे चल रही है? जीतन राम मांझी केंद्र में MSME मंत्री हैं, तो जो सारे उद्योगपतियों से चंदा लेकर यह अपने पार्टी में दे रहे हैं, उस बात को उन्हें क्लियर कर देना चाहिए। दूसरी तरफ वो अपने परिवार को ही टिकट दे रहे हैं।परिवार के बाहर आखिर उनका एक भी टिकट बता दीजिए। इन लोग की मानसिकता लोकतंत्र में सत्ता में रहना है। आज अगर हम लोग मजबूत हो गए, तो वह कहेंगे कि कांग्रेस बड़ी मजबूत पार्टी है। समय के साथ जीतन राम मांझी करवट बदलते हैं।