नीतीश कुमार की चौथी पारी! जदयू में कोई चुनौती देने वाला नहीं?,निर्विरोध जीत तय!
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने जा रहा है—नीतीश कुमार फिर से जदयू की कमान संभालने की तैयारी में हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि वे जल्द ही अपनी चौथी पारी की शुरुआत करेंगे।पार्टी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम ....
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने जा रहा है—नीतीश कुमार फिर से जदयू की कमान संभालने की तैयारी में हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि वे जल्द ही अपनी चौथी पारी की शुरुआत करेंगे।पार्टी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 22 मार्च तय की गई है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 19 मार्च को नामांकन दाखिल कर सकते हैं और इसके लिए जरूरी कागजात पर वे पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं। उनके प्रस्तावकों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिनमें कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा का नाम भी प्रमुख है।
नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय
पार्टी के अंदरूनी माहौल को देखते हुए यह चर्चा जोरों पर है कि इस पद के लिए कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरेगा। ऐसे में नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 24 मार्च है और उसी दिन उनके फिर से अध्यक्ष बनने की आधिकारिक घोषणा संभव है।अगर ऐसा होता है, तो यह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार का चौथा कार्यकाल होगा। वे 2016 में पहली बार इस पद पर आए थे और 2019 में भी बिना किसी मुकाबले के चुने गए थे। वर्ष 2020 में उन्होंने यह जिम्मेदारी आरसीपी सिंह को सौंपी थी, लेकिन 2023 में फिर से खुद कमान संभाली और अब एक बार फिर उसी भूमिका में वापसी की तैयारी में हैं।
राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी की अहम बैठक
इसी बीच पटना में जदयू की राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी की अहम बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें देशभर से पार्टी प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह भी संकेत मिल रहे हैं कि कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की व्यवस्था बरकरार रह सकती है और इस भूमिका में संजय झा आगे भी जिम्मेदारी निभा सकते हैं।कुल मिलाकर, जदयू में एक बार फिर नीतीश कुमार का नेतृत्व मजबूत होता नजर आ रहा है। आने वाले समय में इसका असर न सिर्फ संगठनात्मक ढांचे पर, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता













