दानापुर के पूर्व विधायक रीतलाल यादव को बड़ा झटका -हाई कोर्ट का सख्त रुख, जमानत से इनकार
बिहार की सियासत और अपराध जगत से जुड़ा एक बड़ा नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। दानापुर के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता रीतलाल यादव को पटना हाई कोर्ट से करारा झटका लगा है। गंभीर आपराधिक आरोपों में जेल में बंद पूर्व विधायक की नियमित जमानत याचिका अदालत ने सख्ती से खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि अपराध की प्रकृति...............
बिहार की सियासत और अपराध जगत से जुड़ा एक बड़ा नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। दानापुर के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता रीतलाल यादव को पटना हाई कोर्ट से करारा झटका लगा है। गंभीर आपराधिक आरोपों में जेल में बंद पूर्व विधायक की नियमित जमानत याचिका अदालत ने सख्ती से खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य और आरोपी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए फिलहाल राहत देना संभव नहीं है।
कोर्ट का सख्त रुख, जमानत से इनकार
यह फैसला न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने सुनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि आरोप बेहद गंभीर हैं और ऐसे मामलों में जमानत देने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी का प्रभाव क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर सकता है, जिससे गवाहों और सबूतों पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
रीतलाल यादव के खिलाफ मामला खगौल थाना कांड संख्या 171/2025 से जुड़ा है। उन पर रंगदारी के जरिए अवैध वसूली, आपराधिक बल का प्रयोग कर निजी और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने तथा संगठित अपराधी गिरोह चलाने जैसे गंभीर आरोप हैं।अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपी की सक्रियता और प्रभाव के कारण स्थानीय स्तर पर दहशत का माहौल बना रहता है, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
बचाव पक्ष की दलीलें बेअसर
आवेदक की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेन्द्र नारायण ने जमानत की अपील करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को अनावश्यक रूप से हिरासत में रखा गया है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अजय मिश्रा ने इसका कड़ा विरोध किया और आरोपी के आपराधिक इतिहास का हवाला दिया।कोर्ट ने पुलिस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया।
40 से अधिक मुकदमे, बढ़ी मुश्किलें
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि रीतलाल यादव के खिलाफ विभिन्न थानों में करीब 40 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अदालत ने इस तथ्य को गंभीर मानते हुए कहा कि इतने मामलों के लंबित रहने की स्थिति में जमानत देना उचित नहीं होगा।कोर्ट ने यह भी माना कि आदतन अपराध के आरोपों से घिरे व्यक्ति को रिहा करना समाज के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।रीतलाल यादव 13 जून 2025 से इस मामले में जेल में बंद हैं। गिरफ्तारी के बाद से लगातार जमानत के लिए प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन हाई कोर्ट के इस फैसले ने फिलहाल उनकी रिहाई की संभावनाओं पर विराम लगा दिया है। अब आगे की सुनवाई तक उन्हें जेल में ही रहना होगा।













