भीषण गर्मी का असर: बिहार के 80 हजार सरकारी स्कूल 6 अप्रैल से मॉर्निंग शिफ्ट में, नया टाइम टेबल जारी
बिहार में बढ़ती गर्मी को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया है। अब राज्य के करीब 80 हजार सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को राहत मिलने वाली है। शिक्षा विभाग ने 6 अप्रैल से सभी सरकारी स्कूलों को मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने का निर्देश जारी किया है, ताकि बच्चे तेज धूप और लू से सुरक्षित रह सकें। नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगे और दोपहर.....
बिहार में बढ़ती गर्मी को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया है। अब राज्य के करीब 80 हजार सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को राहत मिलने वाली है। शिक्षा विभाग ने 6 अप्रैल से सभी सरकारी स्कूलों को मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने का निर्देश जारी किया है, ताकि बच्चे तेज धूप और लू से सुरक्षित रह सकें। नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगे और दोपहर 12:20 बजे तक चलेंगे। छात्रों की छुट्टी 12:20 बजे कर दी जाएगी, जबकि शिक्षकों को 12:30 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। यह फैसला गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए लिया गया है। कई जिलों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक के निर्देशों के आधार पर इसे लागू करने के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
पूरा टाइम टेबल
नए टाइम टेबल के अनुसार, सुबह 6:30 बजे से 7:00 बजे तक प्रार्थना और चेतना सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 7:00 बजे से कक्षाओं की शुरुआत होगी। पहली घंटी 7:00 से 7:40 बजे, दूसरी 7:40 से 8:20 बजे और तीसरी 8:20 से 9:00 बजे तक चलेगी। 9:00 से 9:40 बजे तक मध्यांतर रखा गया है। इसी दौरान प्रारंभिक विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) दिया जाएगा। इसके बाद 9:40 से 10:20 बजे तक चौथी घंटी की पढ़ाई होगी।इसके बाद 10:20 से 11:00 बजे तक पांचवीं, 11:00 से 11:40 बजे तक छठी और 11:40 से 12:20 बजे तक सातवीं घंटी चलेगी। सातवीं घंटी के बाद 12:20 बजे बच्चों की छुट्टी कर दी जाएगी।
शिक्षकों के लिए निर्देश
बच्चों की छुट्टी के बाद 12:20 से 12:30 बजे तक शिक्षक विद्यालय में रुककर दिनभर की पढ़ाई की समीक्षा करेंगे। इस दौरान अगले दिन की पढ़ाई की योजना और दिए गए होमवर्क की जांच भी की जाएगी।शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि सिर्फ समय बदलना ही मकसद नहीं है, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार भी प्राथमिकता है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि छात्रों को बेहतर और प्रभावी शिक्षा मिल सके।













