‘लालू की पाठशाला’ पर गिरिराज का करारा तंज, परिवारवाद को बताया वजह
सम्राट चौधरी को ‘लालू की पाठशाला’ का छात्र बताने पर तंज कसते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर Lalu Prasad Yadav की पाठशाला इतनी प्रभावी होती, तो वहां से नेता बाहर क्यों जाते? उन्होंने परिवारवाद पर...
बिहार की सियासत में ‘लालू की पाठशाला’ को लेकर बयानबाज़ी अब तीखे राजनीतिक संघर्ष में बदलती जा रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान के बाद सत्ताधारी दल के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। यह विवाद अब सिर्फ शब्दों की जंग नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत और नेतृत्व क्षमता पर सीधा सवाल बन गया है।
जनता सब समझती है
सबसे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव के ‘पाठशाला’ वाले बयान को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने इस टिप्पणी को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि जनता सब समझती है।इसके बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी गंगा और समंदर की तरह है, जहां आने वाला हर नेता पार्टी की विचारधारा में खुद को ढाल लेता है।
लालू की पाठशाला’ का छात्र बताने पर तंज
गिरिराज सिंह ने तेजस्वी यादव के उस बयान पर भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने भाजपा में नेताओं के मुख्यमंत्री बनने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए हिमंता बिस्वा सरमा का नाम लिया और कहा कि आज वे भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
सम्राट चौधरी को ‘लालू की पाठशाला’ का छात्र बताने पर तंज कसते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर लालू यादव की पाठशाला इतनी प्रभावी होती, तो वहां से नेता बाहर क्यों जाते? उन्होंने परिवारवाद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब किसी पार्टी में एक ही परिवार का वर्चस्व बढ़ जाता है, तो अन्य नेताओं के लिए अवसर सीमित हो जाते हैं।यही कारण है कि लोग विकल्प तलाशते हैं।













