फरवरी से ई-रिक्शा पर सख्ती, 7 हजार शहर से बाहर, 8 हजार सीमित रूट पर
पटना शहर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक जाम सिर्फ वाहनों की भीड़ नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की तस्वीर पेश कर रहा है। चौक-चौराहों से लेकर मुख्य सड़कों तक हर जगह रेंगता जाम प्रशासनिक बेबसी और अव्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है। इस हालात की सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं बेतरतीब तरीके से चल रहे ई-रिक्शा, जो न तय मार्गों का पालन करते हैं और न ही किसी नियम-.................
पटना शहर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक जाम सिर्फ वाहनों की भीड़ नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की तस्वीर पेश कर रहा है। चौक-चौराहों से लेकर मुख्य सड़कों तक हर जगह रेंगता जाम प्रशासनिक बेबसी और अव्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है। इस हालात की सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं बेतरतीब तरीके से चल रहे ई-रिक्शा, जो न तय मार्गों का पालन करते हैं और न ही किसी नियम-कानून की परवाह करते हैं। वहीं पटना शहर में बढ़ते जाम को लेकर अब जाकर परिवहन विभाग और ट्रैफिक प्रशासन की नींद टूटी है। प्रशासन ने ऐलान किया है कि फरवरी से ई-रिक्शा के परिचालन को कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थित किया जाएगा।
शहर में 15 हजार ई-रिक्शा, आधे होंगे बाहर
फिलहाल पटना की सड़कों पर करीब 26 हजार सीएनजी ऑटो और लगभग 15 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं। प्रशासन की नई योजना के तहत—
करीब 8 हजार ई-रिक्शा को शहर के छोटे और आंतरिक मार्गों तक सीमित किया जाएगा। शेष 7 हजार ई-रिक्शा को शहरी सीमा से बाहर किया जाएगा। साथ ही 5 हजार ऑटो को भी शहर से हटाकर प्रखंड क्षेत्रों की ओर भेजने की तैयारी है। यह फैसला सिर्फ ट्रैफिक सुधार नहीं, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अब अव्यवस्था को खुली छूट नहीं मिलेगी।
नगर निगम क्षेत्र में बनेंगे अधिकृत स्टैंड
वहीं पटना नगर निगम क्षेत्र में 10 से अधिक अधिकृत ई-रिक्शा और ऑटो स्टैंड बनाने की योजना है। इसके लिए जगह चिह्नित करने का सर्वे चल रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि यह सर्वे जमीन पर उतरेगा या फिर फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।फिलहाल ई-रिक्शा चालकों ने अपनी सुविधा के अनुसार शहर में करीब 80 अवैध स्टैंड बना रखे हैं। ये अवैध स्टैंड शहर के लगभग हर बड़े चौराहे और गोलंबर को जाम का केंद्र बना चुके हैं।पटना जंक्शन, गांधी मैदान, बोरिंग चौराहा, मीठापुर, राजेंद्रनगर, फुलवारी शरीफ और पटना सिटी—शहर का शायद ही कोई इलाका बचा हो जहां अव्यवस्था का असर न दिखता हो।
हर साल बढ़ रहे ई-रिक्शा, नियम अब भी अधूरे
बता दें कि हर साल करीब 2 हजार नए ई-रिक्शा रजिस्टर हो रहे हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए अब तक कोई ठोस और सख्त नियम-कानून लागू नहीं हो पाया है।दरअसल यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल खड़े करती है।अब देखना यह है कि फरवरी में तय किए जाने वाले मार्ग और स्टैंड सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रहते हैं या वाकई पटना की सड़कों पर राहत और व्यवस्था लेकर आते हैं।













