तेजस्वी-राबड़ी की गैरमौजूदगी पर बोले चिराग,-परिवार के मुखिया पहुंच गए तो...बाकी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं

मकर संक्रान्ति के मौके पर पटना में राजनीति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने प्रदेश कार्यालय में भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इस आयोजन ने न सिर्फ एनडीए की एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि बिहार की राजनीति से जुड़े कई अहम संदेश...

तेजस्वी-राबड़ी की गैरमौजूदगी पर बोले चिराग,-परिवार के मुखिया पहुंच गए तो...बाकी चीजों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं

मकर संक्रान्ति के मौके पर पटना में राजनीति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने प्रदेश कार्यालय में भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इस आयोजन ने न सिर्फ एनडीए की एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि बिहार की राजनीति से जुड़े कई अहम संदेश भी दिए।

राम विलास पासवान को श्रद्धांजलि अर्पित की
इस पारंपरिक भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, मंत्री दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय समेत राजनीति और समाज के कई बड़े चेहरे शामिल हुए। सभी नेताओं ने पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।

 इसे राजनैतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए
कार्यक्रम के दौरान चिराग पासवान ने पत्रकारों से खुलकर बातचीत की। उन्होंने दही-चूड़ा भोज को रिश्तों को मजबूत करने वाली खूबसूरत परंपरा बताया और कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य राजनीति से ऊपर उठकर सहयोगियों और परिवार के साथ कुछ यादगार पल बिताना है।इसी दौरान चिराग पासवान ने तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में लालू प्रसाद यादव के पहुंचने, लेकिन तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी के नहीं आने को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह पूरी तरह पारिवारिक विषय है और इसे राजनैतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। लालू प्रसाद यादव खुद वहां मौजूद थे। परिवार के मुखिया जब पहुंच गए तो बाकी चीजों पर बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

अब कहां जाएंगे यह फैसला उनको करना है
इसके अलावा आरसीपी सिंह के जदयू में लौटने की अटकलों पर भी चिराग पासवान ने बेबाक राय रखी और कहा कि कुछ दिन पहले वे दूसरी पार्टी (जन सुराज पार्टी) से जुड़े थे। अब कहां जाएंगे यह फैसला उनको करना है।बता दें कि मकर संक्रान्ति के इस मौके पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने एक बार फिर यह दिखाया कि बिहार की राजनीति में परंपरा, संवाद और सियासी संदेश साथ-साथ चलते हैं।