बिहार में महिलाओं की सुरक्षित यात्रा को नई रफ्तार: पिंक बसों में होगी 500 महिला कर्मियों की नियुक्ति
बिहार सरकार महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान और सशक्तिकरण को लेकर लगातार ठोस पहल कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में संचालित पिंक बस सेवा को और सुदृढ़ करने की तैयारी है। सरकार जल्द ही पिंक बसों के संचालन के लिए 250 महिला चालक और 250 महिला संवाहक नियुक्त करने जा रही है। यह जानकारी परिवहन मंत्री सह बिहार हॉकी संघ के अध्यक्ष श्रवण कुमार..........
बिहार सरकार महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान और सशक्तिकरण को लेकर लगातार ठोस पहल कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में संचालित पिंक बस सेवा को और सुदृढ़ करने की तैयारी है। सरकार जल्द ही पिंक बसों के संचालन के लिए 250 महिला चालक और 250 महिला संवाहक नियुक्त करने जा रही है। यह जानकारी परिवहन मंत्री सह बिहार हॉकी संघ के अध्यक्ष श्रवण कुमार ने मंगलवार को दी। वे परिवहन परिसर में आयोजित महामना हॉकी गोल्ड कप–2026 की ट्रॉफी और शुभंकर ‘गोलू गौरैया’ के अनावरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
8 जिलों में चल रहीं 100 पिंक बसें
परिवहन मंत्री ने बताया कि राज्य के 8 जिलों में फिलहाल 100 पिंक बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों के जरिए महिलाओं को सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक यात्रा का भरोसा मिला है। आने वाले समय में सेवा को और विस्तार देने की योजना है।उन्होंने बताया कि 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के अवसर पर गांधी मैदान में परिवहन विभाग की झांकी में 6 महादलित महिला चालक पिंक बस चलाती नजर आएंगी। यह दृश्य महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत संदेश देगा।
प्रशिक्षित महिला चालकों को मिलेगा लाइसेंस
वहीं औरंगाबाद स्थित आईडीटीआर से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिला चालकों को जल्द ही पिंक बस संचालन का ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिससे महिला भागीदारी और बढ़ेगी।परिवहन मंत्री ने कहा कि कई स्लीपर बसें सीटर बस के परमिट पर अवैध रूप से मॉडिफाई कर चलाई जा रही हैं। ऐसे सभी मामलों की जांच कर नियम विरुद्ध बसों के परमिट रद्द किए जाएंगे।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगी बड़ी राहत
इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुई परिवहन मंत्रियों की बैठक में निर्णय लिया गया है कि अब सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के इलाज के लिए केंद्र सरकार 1.5 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान करेगी।इसके साथ ही, सड़क दुर्घटना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीरों को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा, ताकि लोग बिना डर के मदद के लिए आगे आएं।
इमरजेंसी सेवाएं होंगी और तेज
वहीं सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा समेत 6 जिलों में जीरो फैटेलिटी का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सड़क सुधार, ट्रैफिक प्रबंधन और निगरानी जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं।दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से 2000 से अधिक एम्बुलेंस को 102 इमरजेंसी नंबर से जोड़ा जा रहा है, जिससे आपातकालीन सेवाएं और प्रभावी बन सकें।बता दें कि राज्य सरकार की ये पहलें न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा को नया आयाम देंगी, बल्कि बिहार को सुरक्षित और संवेदनशील परिवहन व्यवस्था की ओर भी अग्रसर करेंगी













