नीतीश युग का अंत? दिल्ली की राजनीति में नई पारी,10 अप्रैल को लेंगे शपथ, बिहार को मिलेगा नया मुख्यमंत्री
बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नीतीश कुमार, जिन्होंने करीब दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभाली, अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के फैसले को बिहार की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।। साल 2005 से लगातार सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का यह फैसला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट भी.....
बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नीतीश कुमार, जिन्होंने करीब दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभाली, अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के फैसले को बिहार की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।। साल 2005 से लगातार सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का यह फैसला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट भी माना जा रहा है।वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पुष्टि की है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इस घोषणा के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
राज्यसभा में बिहार का बढ़ता ‘सियासी वजन’
इस बार राज्यसभा चुनाव में बिहार से कई बड़े नेताओं की एंट्री हुई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं। नितिन नवीन (भाजपा), उपेंद्र कुशवाहा (रालोमो), रामनाथ ठाकुर (केंद्रीय मंत्री), शिवेश कुमार। तीन-तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का एक साथ राज्यसभा पहुंचना यह संकेत देता है कि केंद्र की राजनीति में बिहार की भूमिका और मजबूत हो रही है।
अब कौन बनेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?
नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार की कमान अब किसके हाथ में जाएगी। राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा जोरों पर है।ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि एनडीए इस बार किसी भाजपा नेता को मुख्यमंत्री बना सकती है। वहीं, कुछ समर्थक निशांत कुमार को आगे लाने की मांग कर रहे हैं। पटना में इसके समर्थन में पोस्टर भी देखे गए हैं।
क्या कहता है राजनीतिक समीकरण?
सूत्रों के अनुसार, एनडीए का केंद्रीय नेतृत्व और नीतीश कुमार मिलकर जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला ले सकते हैं। कोशिश होगी कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद शासन-प्रशासन में निरंतरता बनी रहे।नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के एक लंबे अध्याय का समापन है। अब सबकी निगाहें नए मुख्यमंत्री और आने वाली राजनीतिक दिशा पर टिकी हैं।













