पटना शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस में बड़ा मोड़, अब POCSO एक्ट के तहत होगी जांच

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ताज़ा घटनाक्रम में पटना पुलिस इस केस में POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ने की तैयारी कर रही है। FSL रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर मेल स्पर्म की पुष्टि होने के बाद दुष्कर्म की आशंका पुख्ता मानी जा रही है। ऐसे में छात्रा को नाबालिग मानते हुए POCSO...

पटना शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस में बड़ा मोड़, अब POCSO एक्ट के तहत होगी जांच

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ताज़ा घटनाक्रम में पटना पुलिस इस केस में POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ने की तैयारी कर रही है। FSL रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर मेल स्पर्म की पुष्टि होने के बाद दुष्कर्म की आशंका पुख्ता मानी जा रही है। ऐसे में छात्रा को नाबालिग मानते हुए POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

POCSO लगते ही बदलेगी केस की दिशा
POCSO एक्ट जुड़ने के बाद मामले में कानूनी कार्रवाई और तेज़ होगी। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) जल्द ही कोर्ट में छात्रा को नाबालिग बताते हुए अन्य संगीन धाराएं जोड़ने की तैयारी कर रही है। इस पूरे प्रकरण की जांच में अब CID भी सक्रिय रूप से जुट गई है, जिससे साफ है कि मामला हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील माना जा रहा है।

DNA प्रोफाइलिंग से खुलेगा सच
जांच में बड़ा खुलासा यह है कि छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म की DNA प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इस प्रोफाइल की तुलना हॉस्टल मकान मालिक मनीष रंजन समेत कुल 15 लोगों के DNA सैंपल से की जाएगी। पुलिस एक-एक कर सभी का DNA टेस्ट कराएगी। इन 15 लोगों में वे लोग भी शामिल हैं, जिनसे छात्रा की लंबे समय तक बातचीत होती थी।पुलिस ने छात्रा के मोबाइल फोन का CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) खंगालकर संदिग्धों की सूची शॉर्टलिस्ट कर ली है। इन्हीं आधारों पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

पिता का DGP को पत्र, पुलिस पर गंभीर आरोप
इससे पहले छात्रा के पिता ने बिहार के डीजीपी विनय कुमार को पत्र लिखकर जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने चित्रगुप्त नगर थाने की प्रभारी रोशनी कुमारी की भूमिका पर संदेह जताया और जांच को शुरू से भटकाने का आरोप लगाया।परिजनों का कहना है कि हॉस्टल मालिक मनीष रंजन और संचालिका नीलम अग्रवाल के मोबाइल CDR की समय पर जांच नहीं होना शक को और गहरा करता है। परिवार को आशंका है कि इस पूरे मामले के पीछे कोई ‘पावरफुल हाथ’ है, जो केस को दबाने की कोशिश कर रहा है।

लापरवाही पर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
गौरतलब हो कि मामले में लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस ने चित्रगुप्त नगर थाने की प्रभारी रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के दारोगा हेमंत झा को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने माना कि सूचना मिलने के बावजूद समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।गंभीर आरोप यह भी है कि घटना के तीन दिन तक न हॉस्टल सील किया गया, न कमरा, न बिस्तर और न ही छात्रा के कपड़े सुरक्षित किए गए। बाद में कार्रवाई शुरू कर वरीय अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप भी लगे हैं।अब जबकि केस में POCSO एक्ट, DNA जांच और CID की एंट्री हो चुकी है, पूरे बिहार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या छात्रा को इंसाफ मिलेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।