नकल पर सख्ती बेअसर?, दारौंदा सेंटर से वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप,सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
कदाचार-मुक्त और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बीच मैट्रिक परीक्षा के दौरान सीवान से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। दारौंदा प्रखंड स्थित गोरखनाथ आईटीआई परीक्षा केंद्र के अंदर से परीक्षार्थियों का वीडियो वायरल होने के बाद परीक्षा व्यवस्था की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।परीक्षा केंद्र के भीतर मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित...
कदाचार-मुक्त और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बीच मैट्रिक परीक्षा के दौरान सीवान से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। दारौंदा प्रखंड स्थित गोरखनाथ आईटीआई परीक्षा केंद्र के अंदर से परीक्षार्थियों का वीडियो वायरल होने के बाद परीक्षा व्यवस्था की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।परीक्षा केंद्र के भीतर मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित होने और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू होने के बावजूद वीडियो का बाहर आना सुरक्षा में बड़ी चूक का संकेत दे रहा है। यह घटना न केवल प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलती दिख रही है, बल्कि कदाचार-मुक्त परीक्षा के दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है।
कड़े इंतजामों के बावजूद उठे सवाल
राज्य भर में मैट्रिक परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की गई थीं। नकल रोकने के उद्देश्य से परीक्षार्थियों के जूते-मोजे तक पर प्रतिबंध लगाया गया। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, लगातार वीडियोग्राफी कराई जा रही है और दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त मोबाइल सिग्नल बाधित करने के लिए जैमर का भी उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल न हो सके। इसके बावजूद परीक्षा कक्ष के अंदर से वीडियो का वायरल होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोबाइल फोन केंद्र के भीतर कैसे पहुंचा और वहां से वीडियो कैसे रिकॉर्ड किया गया? यदि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी थी, तो ऐसी घटना होना स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
परीक्षा प्रणाली की साख पर असर
यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। इस घटना ने अभिभावकों और छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। साथ ही ईमानदारी से परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों के मनोबल पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।हालांकि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है, लेकिन यदि जांच में मामला सही पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक होगी। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके ।













