चाचा-भतीजा की जोड़ी हिट होई..,JDU दफ्तर के बाहर पोस्टर से बवाल! RCP Singh–Nishant की जोड़ी पर सियासी हलचल तेज
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पटना स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर लगे कुछ पोस्टरों ने न सिर्फ सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को भी सतह पर ला दिया है। इन पोस्टरों में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की तस्वीरों के साथ “चाचा-भतीजा की जोड़ी ....
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पटना स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर लगे कुछ पोस्टरों ने न सिर्फ सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को भी सतह पर ला दिया है। इन पोस्टरों में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की तस्वीरों के साथ “चाचा-भतीजा की जोड़ी हिट होई” लिखा गया है।
पार्टी में विरोध के बावजूद क्यों चर्चा में आरसीपी सिंह?
पोस्टरों में आरसीपी सिंह और निशांत कुमार को एक साथ लाने की मांग खुलकर सामने आने के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या जेडीयू में आरसीपी सिंह की वापसी की जमीन तैयार की जा रही है? और क्या निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर पार्टी के भीतर कोई रणनीति बन रही है? बता दें कि आरसीपी सिंह की जेडीयू में दोबारा वापसी को लेकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही कड़ा विरोध जता दिया है।
बता दें कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जो नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं, साफ कह चुके हैं कि फिलहाल आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की कोई योजना नहीं है। उनका कहना था कि “जो लोग पार्टी छोड़ चुके हैं, उनकी अब जरूरत नहीं है।”इसी तरह बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने भी आरसीपी सिंह की वापसी की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी को ऐसे नेताओं की आवश्यकता नहीं है जो पहले पार्टी छोड़ चुके हैं।उन्होंने आरसीपी सिंह को पार्टी के लिए अनुपयुक्त बताया था। बता दें कि इन बयानों से यह साफ हो गया था कि पार्टी का एक बड़ा तबका आरसीपी सिंह की री-एंट्री के खिलाफ है।
पोस्टर ने बदला सियासी माहौल
इसके बावजूद, जेडीयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने एक बार फिर आरसीपी सिंह की वापसी की अटकलों को हवा दे दी है। आरसीपी सिंह कभी जेडीयू के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते थे और नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे। वे केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, पार्टी से अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर होती चली गई और नई पार्टी बनाने की कोशिश भी सफल नहीं रही।
निशांत कुमार और उत्तराधिकार की बहस
पोस्टरों में निशांत कुमार को आरसीपी सिंह के साथ जोड़कर दिखाना इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बना देता है। निशांत अब तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन बीते कुछ समय से उनकी संभावित एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जेडीयू में भविष्य के नेतृत्व को लेकर मंथन की बातें भी सामने आती रही हैं।पोस्टर के जरिए निशांत को “चाचा-भतीजा” की जोड़ी के रूप में पेश करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर कुछ गुट उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, निशांत कुमार ने अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नीतीश कुमार की चुप्पी, सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी ने सियासी सस्पेंस और बढ़ा दिया है। जेडीयू के सर्वेसर्वा होने के नाते अंतिम फैसला उन्हीं के हाथ में है। बिहार की राजनीति में उनके फैसले अक्सर चौंकाने वाले रहे हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरसीपी सिंह की वापसी हो या निशांत कुमार की भूमिका—आखिरी मुहर नीतीश कुमार ही लगाएंगे। , इसके बाद ही कोई आधिकारिक घोषणा होगी।













