फर्स्ट बिहार झारखंड के फर्जी पत्रकार के सिर पर आखिर किसका है हाथ, चुप्पी क्यों साधे बैठी है सरकार?
आजकल सच्चाई, संतुलन, निष्पक्षता व स्पष्टता की बैसाखी छोड़ जानबूझकर सुनियोजित साजिश के तहत गुमराह करने वाले और उकसाने वाली गलत खबरें प्रकाशित कर पत्रकार अपनी सीमाओं का उल्ंघन कर रहे हैं और सरकार या कानून बिल्कुल खामोश हैं। इसी कड़ी में देसवा न्यूज पर 1st बिहार झरखंड के पत्रकार विवेकानंद के बारे में एक खबर छपी थी।

समाज में बदलाव लाना सबकी जिम्मेदारी है। जिसमें प्रमुख रूप से मीडिया और समाचार पत्र शामिल हैं। मीडिया को गलत चिजों पर निंदा करनी चाहिए और सकारात्मक चिजों की सराहना करना चाहिए। ऐसा अक्सर देखने को मिल रहा है कि कई बार अच्छी खबरें प्रकाशित नहीं होती और गलत खबरें प्रमुखता से अपनी जगह बना लेती हैं । आजकल सच्चाई, संतुलन, निष्पक्षता व स्पष्टता की बैसाखी छोड़ जानबूझकर सुनियोजित साजिश के तहत गुमराह करने वाले और उकसाने वाली गलत खबरें प्रकाशित कर पत्रकार अपनी सीमाओं का उल्ंघन कर रहे हैं और सरकार या कानून बिल्कुल खामोश हैं। इसी कड़ी में देसवा न्यूज पर 1st बिहार झरखंड के पत्रकार विवेकानंद के बारे में एक खबर छपी थी।
खबरें लिखकर उनसे लाखों रुपए की उगाही करता है
बता दें कि 1st बिहार झरखंड के एक यूट्यूबर पत्रकार विवेकानंद जो अपने सीनियर के साथ मिलकर कुछ खास खास सरकारी विभागों के कर्मचारियों के बारे में खबरें लिखकर उनसे लाखों रुपए की उगाही करता है। यही नहीं सरकारी विभाग के कर्मचारियों से लाखों रुपये की उगाही करने के लिए विवेकानंद उस विभाग के वरीय अधिकारियों को रिश्वत के रूप में लड़कियों की सप्लाई भी करता है। वहीं देसवा न्यूज ने 1st बिहार झरखंड के पत्रकार विवेकानंद के बारे में एक स्टोरी चलायी थी जिसमें यह बताया गया था की विवेकानंद किस किस्म का आशिकमिजाज है।
एक पत्रकार का काम क्या है?
बता दें कि विवेकानंद के द्वारा ये बताया गया कि बिहार के एक अधिकारी के यहाँ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी ने जांच कर कार्रवाई की। उस अधिकारी के यहाँ हुई छापेमारी की कार्रवाई के करीब 10 दिनों के बाद संबंधित विभाग ने उस अधिकारी को निलंबित कर दिया। देशवा न्यूज और देशवा बिहार झारखंड देशवा ट्रांसपोर्ट न्यूज को सूत्रों ने जो बताया उन्हीं के हवाले से ये बता दें कि आज के समय में इस घाघ किस्म के ब्लैकमेलर पत्रकार विवेकमंद जैसे यूटुबर का क्या काम है ? ये लोग "भेड़ कि खाल में छुपे हुए भेड़िये हैं" बता दें कि ब्लैकमेलर विवेकानंद ने इस न्यूज को जब पब्लिश किया था तो उस समय इस न्यूज में परिवहन विभाग के दो अन्य अधिकारियों के नाम थे । जिसके बारे में ये डिमांड कर रहा था कि इनको निलंबित किया जाए। अब सोचने वाली बात ये है कि एक पत्रकार का काम क्या है। खबर दिखाना या किसी को फंसाकर उस के लिए सजा की माँग करना, वो भी तब जब मामला किसी जांच एजेंसी के पास हो या न्यायालय में लंबित हो ?
यूट्यूबर पत्रकार विवेकानंद के पिछे कौन है?
आखिर 1st बिहार झरखंड के यूट्यूबर पत्रकार विवेकानंद के पिछे कौन है? जिसका सह पाकर वह इतना बेखौफ होकर यह अपराध कर रहा है। आखिर क्यों कानून की नजर में नहीं है यह भ्रष्ट पत्रकार? क्यों सरकार चुपी साधे बैठी है? इस पत्रकार के खिलाफ अब तक क्यों नहीं कोई कारवाई की गई? आखिर उन सरकारी विभाग के कर्मचारियों को न्याय कब मिलेगा? उन पीड़ित सरकारी कर्मचारियों के साथ साथ हमारे पाठक भी यह जानना चाहते हैं कि आखिर कब हमारे देश को ऐसे भ्रष्ट पत्रकार से मुक्ति मिलेगी? विवेकानंद और उस जैसे भ्रष्ट और लोभी पत्रकार को कब सजा होगी।