चिराग से चेतन तक: दही-चूड़ा भोज में नीतीश कुमार की मौजूदगी से बढ़ा सियासी ताप

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार में दही-चूड़ा भोज महज सांस्कृतिक परंपरा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक ताकत, संदेश और समीकरण दिखाने का अहम मंच बन गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सक्रिय मौजूदगी ने इन आयोजनों को और भी सियासी मायने दे दिए। गुरुवार को सीएम ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर एनडीए के भीतर एकजुटता और संतुलन का स्पष्ट....

चिराग से चेतन तक: दही-चूड़ा भोज में नीतीश कुमार की मौजूदगी से बढ़ा सियासी ताप

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार में दही-चूड़ा भोज महज सांस्कृतिक परंपरा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक ताकत, संदेश और समीकरण दिखाने का अहम मंच बन गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सक्रिय मौजूदगी ने इन आयोजनों को और भी सियासी मायने दे दिए। गुरुवार को सीएम ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर एनडीए के भीतर एकजुटता और संतुलन का स्पष्ट संकेत दिया।

पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़
गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर कार्यकर्ताओं और मीडिया का अभिवादन किया। उनकी मौजूदगी को एनडीए के भीतर बढ़ते तालमेल और आपसी सहजता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी रही।

चेतन आनंद के आवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री,
इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट तक रुके। इस मौके पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और पीएचईडी मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे।चेतन आनंद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद समय निकालकर उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दही-चूड़ा भोज के लिए एनडीए के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था।विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है और परिस्थितियों के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा। 

तेजप्रताप यादव के भोज ने भी बटोरी सुर्खियां
वहीं मकर संक्रांति की दही-चूड़ा राजनीति में राजद नेता तेजप्रताप यादव भी केंद्र में रहे। बुधवार को उन्होंने दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें उनके पिता लालू प्रसाद यादव और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान शामिल हुए। खास बात यह रही कि लालू यादव सबसे पहले कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।इससे पहले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और जदयू नेता रत्नेश सदा के दही-चूड़ा भोज में भी एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। दिलचस्प रूप से, विजय सिन्हा के आयोजन में तेजप्रताप यादव की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

सियासी संकेत साफ
कुल मिलाकर, इस बार मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में मेल-मिलाप, शक्ति प्रदर्शन और आने वाले राजनीतिक समीकरणों का आईना बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति में हर मुलाकात अब खास मायने रखती है।